संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भाषण देते हुए और दाईं ओर राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब देते भारतीय राजनयिक।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अंतर्राष्ट्रीय कानूनी मामलों से संबंधित छठी समिति की बैठक में भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) और पाकिस्तान को आतंकवाद तथा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जमकर फटकार लगाई। भारत ने ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बिप्लब कुमार देब ने भारत का पक्ष रखते हुए सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा करने के भारत के अधिकार को दृढ़ता से दोहराया।

बिप्लब कुमार देब ने पहलगाम में हुए आतंकवादी नरसंहार के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे। ऐसे सीमा-पार आतंकवाद के दोषियों, आयोजकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना अत्यंत आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद का राज्य प्रायोजक (स्टेट स्पॉन्सर) है और पहलगाम हमले के बाद भारत ने वहां पाकिस्तान की सुरक्षा में संचालित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की थी।

सदन को संबोधित करते हुए देब ने 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' (सीसीआईटी) को जल्द से जल्द अपनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए सीसीआईटी को लागू करना जरूरी है, जो पिछले 30 सालों से अटका हुआ है। भारत की ओर से 1996 में प्रस्तावित इस सम्मेलन को कुछ देशों द्वारा रोक कर रखा गया है, जो 'अच्छे आतंकवादियों' और 'बुरे आतंकवादियों' के बीच भेदभाव करते हैं तथा 'स्वतंत्रता सेनानियों' को छूट देने का तर्क देते हैं। देब ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद में 'अच्छा' या 'बुरा' जैसा कोई अंतर नहीं किया जा सकता और बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता।

भारतीय प्रतिनिधि ने यह चिंता भी व्यक्त की कि आतंकवादी भर्ती करने, कट्टरपंथ फैलाने, प्रोपेगैंडा चलाने, ऑपरेशन की योजना बनाने और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। देब ने आतंकवाद से निपटने के संबंध में भारत की छह प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। इन प्राथमिकताओं में नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना, आतंकवादी वित्तपोषण (टेरर फाइनेंसिंग) को समाप्त करना, पीड़ितों को केंद्र में रखना, राष्ट्रीय स्तर पर क्षमता निर्माण को मजबूत करना, आतंकवादी विचारधारा का डटकर सामना करना और आतंकवादी बुनियादी ढांचे को बाधित करना शामिल है। भारत ने वैश्विक मंच से यह संदेश साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।