25 सालों की ऐतिहासिक यात्रा: गुजरात के सीएम से देश के पीएम तक, नरेंद्र मोदी ने कैसे बदली भारतीय उद्योगों की तस्वीर?
गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल में नीतिगत सुधारों और पीएलआई योजना से उद्योग क्षेत्र का विकास हुआ।
सरकार के प्रमुख के रूप में नरेंद्र मोदी के 25 साल पूरे होने पर भारत के औद्योगिक, बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को दर्शाती एक डिजिटल कलाकृति।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के हेड (प्रमुख) के तौर पर आज अपने 25 साल पूरे कर रहे हैं। पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भारतीय उद्योग, विनिर्माण और उद्यमिता का व्यापक विकास हुआ है। तेज आर्थिक प्रगति के चलते देश में लोगों की आमदनी और खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है, जिससे घरेलू बाजार का आकार भी काफी बड़ा हुआ है।
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक के अनुसार, भारत में व्यापार और उद्यमिता की एक पुरानी और मजबूत परंपरा रही है, जिसमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर छोटे और मध्यम उद्योग व व्यापारिक समुदाय हमेशा से शामिल रहे हैं। पिछले 25 वर्षों के दौरान, चाहे गुजरात का क्षेत्र हो या पूरा भारत, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई है।
गुजरात में भरोसे का माहौल और 'वाइब्रेंट गुजरात' की शुरुआत
उद्योगों के विकास के लिए एक ऐसे माहौल की आवश्यकता होती है जहाँ कारोबारियों और निवेशकों को सुरक्षा व भरोसा महसूस हो। इसी भरोसे के आधार पर वे जोखिम उठाकर लंबी अवधि के लिए पूंजी निवेश करते हैं। नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए इस प्रकार का माहौल तैयार किया।
वर्ष 2003 में शुरू किया गया 'वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन' इसी नीति की शुरुआत थी। यह सम्मेलन केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उद्योगों को बढ़ावा देने, कारोबारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझने और व्यापार को आसान (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) बनाने का एक प्रभावी मंच बना। गुजरात के इस मॉडल को देखते हुए बाद में देश के कई अन्य राज्यों ने भी इसी तर्ज पर अपने यहाँ निवेश सम्मेलनों की शुरुआत की।
गुजरात में औद्योगिक विकास के दौरान सिर्फ एक-दो कारखाने लगाने पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को विकसित करने का प्रयास हुआ। इसके तहत बंदरगाह, सड़कें, बिजली, औद्योगिक क्षेत्र और अलग-अलग उद्योगों के समूहों (क्लस्टर्स) को एक साथ आपस में जोड़कर विकसित किया गया।
2014 के बाद देशव्यापी नीतिगत और बुनियादी ढांचे में सुधार
2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला, तो उन्हें गुजरात में हासिल विनिर्माण और औद्योगिक नीतियों के अनुभव को पूरे देश में लागू करने का अवसर मिला। सरकार ने व्यवसाय को सुगम बनाने के लिए कई बड़े नीतिगत सुधार किए:
- सुधार नीतियां: वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), व्यापक डिजिटल व्यवस्था और नए श्रम कानूनों को लागू किया गया, जिससे उद्योगों के लिए संचालन आसान हुआ।
- बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर): बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर किए गए सरकारी खर्च ने भारतीय उद्योग की लॉजिस्टिक्स संबंधी पुरानी समस्याओं को दूर किया। सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एक्सप्रेस-वे के विस्तार से सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में लगने वाले समय और लागत में कमी आई है।
- वैश्विक बाजार तक पहुंच: विभिन्न देशों के साथ किए गए नए व्यापार समझौतों के माध्यम से भारतीय उद्योगों और विनिर्माताओं के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हुई है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और पीएलआई (PLI) योजना का प्रभाव
वर्तमान में दुनिया भर के देश अपनी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के पुनर्गठन पर विचार कर रहे हैं। कोरोना महामारी, वैश्विक संघर्ष, तकनीक पर प्रतिबंध और आवश्यक कच्चे माल से जुड़े विवादों ने यह स्पष्ट किया है कि दुनिया को भरोसेमंद उत्पादन साझेदारों की आवश्यकता है। भारत इस स्थिति का लाभ उठाकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
इस दिशा में सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। इसके मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:
- निवेश प्रतिबद्धता: 14 प्रमुख क्षेत्रों के तहत ₹2.4 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का वादा किया गया है।
- प्रभाव: इस योजना से देश की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो रही है, नया निवेश आ रहा है, रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं और अलग-अलग क्षेत्रों से निर्यात बढ़ रहा है।
- मुख्य क्षेत्र: इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण इसके प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता
वर्तमान समय में विनिर्माण क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। देश के भीतर ही रक्षा उपकरणों के निर्माण, घरेलू स्तर पर अनुसंधान व विकास (R&D) को बढ़ावा देने और भारत को रक्षा तकनीक के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में भारत का रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़ा है।
अनुसंधान, नवाचार और भविष्य के लक्ष्य
भारतीय उद्योग के अगले चरण के लिए ऐसी मध्यम आकार की कंपनियों की आवश्यकता रेखांकित की जा रही है जो आगे चलकर बड़ी वैश्विक कंपनियां बन सकें। इसके लिए लंबी अवधि तक नए विचारों और तकनीकों में पूंजी लगाने वाले निवेशकों की जरूरत है।
युवाओं और कंपनियों को अनुसंधान व नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का 'अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष' गठित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य नई, उन्नत तकनीकों और भविष्य के रणनीतिक क्षेत्रों में आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली को करीब से देखने वाले उद्योगपतियों के अनुसार, वे कंपनियों द्वारा किए जा रहे नए प्रयोगों और वैश्विक तकनीकों में निरंतर रुचि लेते हैं। अपनी विदेश यात्राओं के दौरान देखी गई नई व उपयोगी तकनीकों पर वे भारतीय उद्योगपतियों से चर्चा करते हैं और उन्हें पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के इन 25 वर्षों में उद्योग को केवल एक आर्थिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि देश की समग्र क्षमता और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा है। 'विकसित भारत' का लक्ष्य भारतीय उद्योग जगत के लिए एक आह्वान है कि वह केवल घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे विश्व के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करे और वैश्विक पटल पर भारतीय कंपनियों की एक मजबूत पहचान स्थापित करे।