यूपी के गाँवों से मुंबई तक: जानिए कैसे साधारण युवतियां बन गईं टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले की आरोपी|
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में गिरफ्तार दो महिलाओं के परिवारों और पुलिस जांच से जुड़ी जानकारी सामने आई है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में गिरफ्तार आरोपियों के साथ पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं।
यूपी के गांवों से लेकर सपनों की नगरी मुंबई तक फैले एक सनसनीखेज मामले में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस हाई-प्रफाइल मामले की कड़ियां जब पुलिस ने खंगालनी शुरू कीं, तो जांच की सुई उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों के साधारण परिवारों से ताल्लुक रखने वाली दो युवतियों तक जा पहुंची। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस सिलसिले में कार्रवाई करते हुए कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। गिरफ्तार की गई महिलाओं की पहचान सीतापुर जिले की रहने वाली राधा और आजमगढ़ की निवासी बबीता के रूप में हुई है, जिन पर यह गंभीर आरोप लगा है कि उन्होंने गोलीबारी की इस घटना को अंजाम देने से पहले हथियारों का एक संदिग्ध बैग दिल्ली से मुंबई तक पहुंचाया था।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब मंगलवार को पुलिस ने इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चारों आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस के शुरुआती दावों के अनुसार, गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं उत्तर प्रदेश से काम की तलाश में हरियाणा के सोनीपत गई थीं और वहीं एक-दूसरे के संपर्क में आई थीं। जांच में यह बात सामने आई है कि घटना से कुछ महीने पहले राधा की मुलाकात मामले के एक अन्य आरोपी कुणाल से हुई थी। पुलिस का ऐसा आरोप है कि कुणाल ने ही राधा को एक पिस्तौल और जिंदा कारतूसों से भरा हुआ बैग लेकर मुंबई जाने के लिए राजी किया था, और इस सफर में बबीता भी उसके साथ मौजूद थी। हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियां अपनी तरफ से इन तमाम पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही हैं, लेकिन अभी तक इन दोनों महिलाओं को किसी भी अदालत द्वारा आधिकारिक तौर पर दोषी करार नहीं दिया गया है।
इस घटना के प्रकाश में आने के बाद उत्तर प्रदेश के उन ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मच गया है, जहां से ये युवतियां ताल्लुक रखती हैं। आजमगढ़ जिले के कोठियार गांव में रहने वाली बबीता के परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए बताया कि वह लगभग दो साल पहले घर से निकली थी। परिवार के मुताबिक, गांव के ही कुछ परिचितों ने उसे सोनीपत की एक कंपनी में पैकेजिंग के काम के बारे में बताया था, जहां उसे हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक की कमाई का आश्वासन दिया गया था। बबीता के पिता रामजतन राम इलाके में खेती और मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बबीता ने बेहतर भविष्य और परिवार की मदद की उम्मीद में घर छोड़ा था।
बबीता की बहन नीलम ने मीडिया और पुलिस को दी गई जानकारी में बताया कि बबीता ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई स्थायी या संतोषजनक रोजगार न मिलने की वजह से उसे बाहर जाने का कड़ा फैसला लेना पड़ा। परिवार का यह भी कहना है कि आज तक कभी भी बबीता का नाम किसी भी तरह के आपराधिक मामलों या गतिविधियों में नहीं आया था। जब परिजनों को मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय पुलिस के जरिए यह पता चला कि बबीता का नाम मुंबई में हुई फायरिंग जैसी गंभीर घटना से जुड़ गया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बबीता के पिता और अन्य रिश्तेदार तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचे ताकि यह समझ सकें कि असल में हरियाणा और मुंबई में उनकी बेटी के साथ क्या हुआ है, क्योंकि उनके पास इस मामले की बेहद सीमित और नाकाफी जानकारी थी।
दूसरी तरफ, सीतापुर जिले में रहने वाली राधा के गांव में भी पुलिस की टीम ने पहुंचकर उसके परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों से लंबी पूछताछ की। पुलिस ने इस दौरान कई लोगों के बयान दर्ज किए और राधा के पुराने संपर्कों व पृष्ठभूमि की टोह ली। राधा की मां ने पुलिस के सामने दावा किया है कि उनकी बेटी पूरी तरह निर्दोष है और उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया है। राधा के परिवारवालों ने उन तमाम पुलिसिया आरोपों और घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण मांगा है जिनके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, राधा साल 2021 में ही सीतापुर छोड़कर काम की तलाश में सोनीपत चली गई थी और वहीं पर उसकी मुलाकात बबीता से हुई थी, जिसके बाद दोनों एक ही इलाके में रहकर काम करने लगी थीं।
पुलिस की शुरुआती जांच और टाइमलाइन के अनुसार, ये दोनों महिलाएं गत 15 अक्टूबर को नई दिल्ली से ट्रेन या अन्य माध्यम से मुंबई के लिए रवाना हुई थीं और अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को दादर पहुंची थीं। पुलिस का दावा है कि मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने वहां एक होटल में कमरा लेकर विश्राम किया था। इसके बाद, गोलीबारी की घटना से ठीक एक दिन पहले यानी 17 अक्टूबर को एक नाबालिग लड़के ने राधा से वह संदिग्ध बैग ले लिया था जिसमें हथियार रखे हुए थे। इस काम को अंजाम देने के बाद ये दोनों महिलाएं वापस मुंबई से दिल्ली लौट आईं थीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की बहुत बारीकी से जांच कर रहे हैं कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे कौन लोग थे, हथियारों का यह जखीरा कहां से आया था और इसे लाने-ले जाने तथा आगे सप्लाई करने में किस-किस की क्या भूमिका रही है।
इस मामले की आंच जब उत्तर प्रदेश के जिलों तक पहुंची, तो स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी अपनी तरफ से स्थिति स्पष्ट की। आजमगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर जांच के दौरान ऐसा कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए हथियारों के स्रोत का संबंध आजमगढ़ जिले से है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहलू की मुख्य जांच मुंबई पुलिस द्वारा की जा रही है और स्थानीय पुलिस अन्य राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरी तालमेल बनाकर काम कर रही है। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मामले में अभी भी कई ऐसे गंभीर सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं।
जांचकर्ताओं और पीड़ित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली महिलाओं का परिचय उन शातिर लोगों से किसने कराया था जो अब इस पुलिस जांच के मुख्य दायरे में आ चुके हैं। इसके अलावा यह भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि इन महिलाओं को मुंबई की इस यात्रा के बारे में क्या कहकर बरगलाया गया था और क्या जांच एजेंसियों के पास ऐसा कोई अकाट्य सबूत मौजूद है जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें उस बैग के अंदर रखे हथियारों और उसके असली मकसद की कोई जानकारी थी भी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या देश के अलग-अलग राज्यों से काम की तलाश में बाहर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की भर्ती के नाम पर इस तरह का कोई बड़ा और व्यापक रैकेट चल रहा है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की तह तक जाने के लिए सभी एंगल से अपनी तफ्तीश आगे बढ़ा रही है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।