समाज में जाना चाहिए कड़ा संदेश': पॉक्सो कोर्ट ने बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले में सुनाया सख्त फैसला|
मुंबई की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 4 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोपी 50 वर्षीय ठेकेदार को स्नेह जताने की दलील खारिज कर 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।
मुंबई में 4 साल की मासूम बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को सजा सुनाती विशेष पॉक्सो कोर्ट।
मुंबई की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में एक सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने 50 साल के एक ठेकेदार को इस गंभीर अपराध के लिए 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह पूरी घटना मार्च 2025 की है, जब आरोपी ने बच्ची के साथ इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपनी सफाई में दलील दी थी कि उसने बच्ची को सिर्फ प्यार या स्नेह जताने के लिए चूमा था, लेकिन कोर्ट ने उसकी इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की विशेष जज ऋचा डी. खेडेकर ने आरोपी को 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया। अदालत ने साफ शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी अजनबी व्यक्ति द्वारा की गई इस तरह की हरकत को स्नेह या प्यार नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी पर 10,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अदालत के निर्देश के मुताबिक, यदि आरोपी जुर्माना भरने में असफल रहता है, तो उसे दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने पीड़ित बच्ची को बतौर मुआवजा 5,000 रुपये देने का भी आदेश दिया है।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने चार साल की बच्ची की गवाही को पूरी तरह से भरोसेमंद और विश्वसनीय माना। क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) के दौरान बच्ची ने बहुत सहजता से अदालत को बताया था कि उसके घर-परिवार के परिचित लोग कभी-कभी उसे प्यार से गोद में उठा लेते हैं, हवा में उछालकर वापस पकड़ लेते हैं और चूमने के बाद उसकी मां को सौंप देते हैं। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि ऐसा दोस्ताना और दुलार वाला व्यवहार केवल उन लोगों के साथ होता है जिन्हें बच्ची पहले से अच्छी तरह जानती है, जबकि इस मामले में आरोपी बच्ची के लिए पूरी तरह से एक अजनबी था। यही वजह है कि अदालत ने आरोपी की इस सफाई को पूरी तरह अविश्वसनीय माना कि वह महज स्नेह जता रहा था।
घटना के विवरण के अनुसार, यह मामला 3 मार्च 2025 का है। उस दिन चार साल की बच्ची अपनी मां से थोड़ा आगे-आगे चलते हुए मंदिर की तरफ जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में आरोपी ने उसे अचानक दबोच लिया और उसकी गर्दन व हाथ कसकर जकड़ लिए। इसके बाद उसने बच्ची को जबरन चूमा और उसके गाल तथा गर्दन के पिछले हिस्से पर काट लिया। इस दर्दनाक और डरावनी हरकत से बच्ची बुरी तरह डर गई और जोर-जोर से रोने लगी।
बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर इकट्ठा हो गए और उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। इसके बाद लोगों ने आरोपी को तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और तब से वह लगातार न्यायिक हिरासत में ही था। अदालत ने अपने फैसले में यह भी आदेश दिया है कि आरोपी को मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि का पूरा लाभ दिया जाए।
फैसला सुनाते हुए विशेष जज ने इस बात पर जोर दिया कि चार साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में शुरुआती स्तर पर ही सख्त से सख्त सजा दी जानी बेहद जरूरी है, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में मिलने वाली सजा ऐसी होनी चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी नाबालिग पीड़िता के खिलाफ ऐसा अपराध करने की हिम्मत तक न जुटा सके।