तमिलनाडु विधानसभा उपचुनाव के दौरान मतदान केंद्र के बाहर अपनी पहचान पर्ची दिखाकर कतार में खड़ी महिला मतदाता।

तमिलनाडु की दो प्रमुख विधानसभा सीटों—मदुरांतकम और धारापुरम—तथा पुडुचेरी की थट्टांचावडी सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी है। ये सीटें तब खाली हुई थीं जब एक से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करने वाले विधायकों या सांसदों ने अपनी एक-एक सीट बचाते हुए दूसरी सीटों से इस्तीफा दे दिया था। इन उपचुनावों के नतीजे आगामी 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

तमिलनाडु में इस बार एक अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहा है। मदुरांतकम और धारापुरम में अन्नाद्रमुक (AIADMK) की पूर्व विधायक के. मरागाथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा अब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी में शामिल होकर सत्तारूढ़ टीवीके (TVK) के टिकट पर फिर से चुनावी मैदान में हैं। यहाँ मुकाबला चतुष्कोणीय बना हुआ है, जिसमें TVK, द्रमुक (DMK), AIADMK और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। उम्मीदवारों की बात करें तो मदुरांतकम सीट पर 27 प्रत्याशी और धारापुरम सीट पर 22 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

इन उपचुनावों में आमतौर पर दिखने वाली सुस्ती के विपरीत बड़े नेताओं की भारी सक्रियता और जोरदार प्रचार देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने चुनाव से पहले जमकर रैलियां और प्रचार किया। यह चुनाव सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों खेमों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु की मौजूदा विधानसभा में टीवीके के 107 (अध्यक्ष सहित), द्रमुक के 59, अन्नाद्रमुक के 41, कांग्रेस के 5, पीएमके के 4, भाकपा और माकपा के 2-2, वीसीके के 2 और आईयूएमएल के 2 विधायक हैं।

चुनावी सरगर्मियों के बीच धारापुरम में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। टीवीके सरकार में मंत्री अरुण राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर डीएमके नेता वी. सेंथिल बालाजी पर जोरदार निशाना साधा है। मंत्री अरुण राज ने लिखा, "जो लोग भ्रष्टाचार के अंधेरे में डूबे हैं, क्या वे रोशनी की बुराई करेंगे?" उन्होंने कहा कि धारापुरम उपचुनाव में हार के डर से डीएमके नेता वी. सेंथिल बालाजी ने टीवीके पर जो बेबुनियाद आरोप लगाए हैं, वे उसकी कड़ी निंदा करते हैं और उसे पूरी तरह खारिज करते हैं। अरुण राज ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर लगाए गए ये आरोप सच्चाई से कोसों दूर और मनगढ़ंत हैं।

इसके अलावा पुडुचेरी की थट्टांचावडी सीट और असम के नागांव उपचुनाव भी इस चुनावी तस्वीर को विस्तार देते हैं। ये दोनों मुकाबले सत्तारूढ़ गठबंधन की संगठनात्मक ताकत और बड़े चुनावी फायदे को स्थानीय क्षेत्र स्तर पर जीत में बदलने की क्षमता का कड़ा परीक्षण करेंगे।

मंगलवार को हो रहे इस मतदान से तीन बड़े राजनीतिक संकेतों की उम्मीद जताई जा रही है:

  • क्या बीजेपी सरकार में आने के बाद अपनी चुनावी रफ्तार और बढ़त को बरकरार रख पाती है?
  • विपक्ष में मुख्य चुनौती देने वाले (चैलेंजर) के रूप में कौन सी पार्टी उभरकर सामने आती है?
  • क्या बिखरी हुई क्षेत्रीय ताकतें इस चुनाव में अपनी राजनीतिक और चुनावी अहमियत कायम रख पाएंगी?