मुंबई (मलबार हिल):  "मुंबई का बनारस" कहे जाने वाले मलबार हिल स्थित ऐतिहासिक बाणगंगा कुंड की पितृपक्ष के दौरान बेहद दयनीय स्थिति देखने को मिल रही है। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किए जा रहे पिंडदान और पूजा-पाठ की आड़ में कुंड के जल को इस कदर प्रदूषित कर दिया गया है कि पिछले दो दिनों के भीतर सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। रविवार की सुबह कुंड के पानी पर तैरते मछलियों के शव देखकर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश फैल गया है।

भगवान राम के बाण से उद्गमित हुआ था यह कुंड

बाणगंगा कुंड का सीधा संबंध त्रेतायुग और रामायण काल से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण जी समुद्र किनारे से गुजर रहे थे, तब उन्हें तीव्र प्यास लगी। श्रीराम ने अपने कोदंड धनुष से पृथ्वी पर बाण चलाया, जिससे गंगा जैसी पवित्र और मीठे पानी की धारा प्रस्फुटित हुई। इसी बाण से निकले कुंड को बाणगंगा के नाम से जाना जाता है। इस परिसर में कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जो इस घाट को अत्यंत पवित्र बनाते हैं। मुंबई और आसपास के इलाकों से लोग यहाँ धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं।

पितृपक्ष में उमड़ी भीड़ और जल का दम घोंटता नैवेद्य

इन दिनों पितृपक्ष के चलते बाणगंगा घाट पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पितरों के मोक्ष के लिए मुंबई के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ नवी मुंबई जैसे दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में पंडित और पुरोहित यहाँ आकर घाट पर डेरा डाले हुए हैं।

पिंडदान के दौरान होने वाली विधियों के बाद पिंड, पूजा सामग्री, नैवेद्य और भोग की बची हुई सामग्री को सीधे कुंड के जल में बहाया जा रहा है। पिछले दो-तीन दिनों के दौरान इतनी भारी मात्रा में भोग और खाद्य सामग्री पानी में फेंकी गई कि वह कुंड के तल में बैठकर सड़ने लगी। इसके परिणामस्वरूप जल का ऑक्सीजन स्तर बुरी तरह गिर गया और पूरे कुंड से तीखी दुर्गंध आने लगी।

स्थानीय निवासियों का आरोप: अधिक दक्षिणा के चक्कर में फैल रही अराजकता

स्थानीय लोगों से बात करने पर उनका दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दिया। निवासियों का कहना है कि दो दिन पहले तक कुंड की स्थिति सामान्य थी। लेकिन पितृपक्ष में अधिक दक्षिणा कमाने की होड़ में बाहर से आए पंडितों और श्रद्धालुओं ने बिना सोचे-समझे पूजा सामग्री और भोजन पानी में फेंक दिया।

स्थानीयों का सीधा आरोप है कि नवी मुंबई और अन्य बाहरी क्षेत्रों से आए पंडितों की भीड़ के कारण यहाँ अराजकता फैली है। अधिक से अधिक अनुष्ठान कराकर पैसे कमाने के चक्कर में स्वच्छता और कुंड की मर्यादा को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। इसी प्रदूषित सामग्री को खाने और जल में दम घुटने से निर्दोष मछलियों की मौत हुई है।

बीएमसी की लापरवाही और दिशानिर्देशों का अभाव

इस पूरी घटना में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थल पर पितृपक्ष के दौरान कचरा और पूजा सामग्री प्रबंधन के लिए कोई ठोस नियमावली या दिशानिर्देश लागू नहीं किए गए।

न तो बीएमसी की ओर से कुंड में सीधे नैवेद्य और पिंड फेंकने पर रोक लगाई गई और न ही पानी की नियमित सफाई का कोई बंदोबस्त किया गया। प्रशासन की इस अनदेखी के कारण जहाँ एक ओर ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर प्रदूषित हो रही है, वहीं दूसरी ओर बेजुबान जलीय जीवों की जान जा रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बीएमसी तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे, कुंड की सफाई कराए और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए।