बाएं और दाएं हिस्सों में बचाव दल के सदस्य सड़क सुरंग के भीतर राहत कार्य करते हुए नजर आ रहे हैं।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के प्रकोप को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन इस भयंकर आपदा के निशान और इसका दर्द अभी भी गहरा बना हुआ है। हालांकि तमाम चुनौतियों के बीच नेपाल के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों लोगों को सेना और बचाव दलों द्वारा रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन अभी भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में काल के मुंह से जिंदा लौटकर आए लोगों ने अपनी खौफनाक आपबीती साझा की है, जो रोंगटे खड़े करने वाली है।

नेपाल के मेलुंग पनबिजली परियोजना क्षेत्र के एक तकनीकी कर्मचारी शिव गिरी ने अपनी जान बचने के संघर्ष को बयां करते हुए बताया कि बाढ़ का पानी जब हर चीज को अपनी आगोश में ले रहा था, तब उनके पास अपनी जान बचाने के लिए सिर्फ ऊपर की ओर भागने का ही एकमात्र विकल्प बचा था। परियोजना से भागते समय उन्होंने अपनी आंखों के सामने मकानों, बस्तियों और कई बड़े बांधों को ताश के पत्तों की तरह बहते हुए देखा। जिंदगी की इस खतरनाक जंग में वे लगातार पहाड़ी पर चढ़ते चले गए। 'नेपाल न्यूज' को दिए साक्षात्कार में गिरी ने बताया कि इस दौरान उनके कई साथी मजदूर और उनका चचेरा भाई भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। रास्ते पूरी तरह से बंद होने के कारण उनके समूह ने करीब 12 घंटे तक जंगल के रास्ते पैदल सफर तय किया, जिसके बाद उन्हें एक गुफा मिली जहां उन्होंने अपनी रात बिताई। अगले दिन उनका ग्रुप नीचे आया और मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद आर्मी के हेलिकॉप्टर ने उन्हें एयरलिफ्ट कर काठमांडू पहुंचाया जहां उनका इलाज चल रहा है।

इसी तरह की एक अन्य घटना में अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना के सिविल इंजीनियर संदीप राणा ने लगभग 100 अन्य कर्मचारियों के साथ पहाड़ी पर चढ़कर अपनी जान बचाई। 'द राइजिंग नेपाल' से बात करते हुए राणा ने बताया कि जब वे कार्यालय के भीतर थे, तभी अचानक सायरन बजा। बांध स्थल से लगभग 12 किलोमीटर ऊपर की ओर और भयंकर बाढ़ आ चुकी थी। गीले कपड़ों के साथ ही उन्होंने बिना एक पल गंवाए पहाड़ी पर चढ़ना शुरू कर दिया और त्रिशूली नदी के जलस्तर से लगभग 35 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गए। वहां से उन्होंने परियोजना दफ्तर, रिहायशी शिविरों और सड़कों को पूरी तरह पानी में डूबते देखा। राणा ने बताया कि उन्हें लगातार ऊपर चढ़ते रहना था और साथ ही ऊपर से गिरते खतरनाक पत्थरों से भी खुद को बचाना था। करीब सात से आठ घंटे की भारी चढ़ाई के बाद शाम को उनका यह दल सड़क तक पहुंच पाया, हालांकि इस दौरान उनके साथ केवल दो ही लोग बच पाए थे बाकी अन्य साथी बीच में ही बिछड़ गए थे।

सुरंगों के भीतर फंसे लोगों के लिए भी स्थिति कम डरावनी नहीं थी। 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, रामचंद्र नामक व्यक्ति ने त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सुरंग के अंदर बिताए डरावने पलों का जिक्र किया। जब सुरंग के रास्तों में अचानक पानी घुसने लगा, तब रामचंद्र और उनके पांच साथी बाहर निकलने के मुख्य मार्ग से काफी दूरी पर थे। मौत को सामने देखकर उन्होंने बचने के लिए सुरंग की छत पर लगी लोहे की सीढ़ी को मजबूती से पकड़ लिया। उनके एक साथी ने टॉर्च की रोशनी से सीढ़ी का रास्ता दिखाया और वे लगभग छह घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी पर चढ़ते हुए सुरक्षित स्थान की ओर बढ़ते रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभियानों में अब तक सुरंगों के भीतर से लगभग 280 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, हालांकि अभी भी कई लोग अंदर फंसे हुए हैं और भारत तथा चीन के विशेषज्ञ दल भी इस राहत अभियान में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।

इस भारी तबाही के बीच मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। त्रिशूली बाजार में बाढ़ के कारण कई घर नेस्तनाबूद हो चुके हैं, लेकिन एक वफादार काला-सफेद कुत्ता अपनी जगह छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह श्वान बार-बार उसी स्थान पर लौटकर आ रहा है जहां कभी उसके मालिक का घर हुआ करता था और चारपाई बिछी रहती थी। भारी मशीनों के शोर और ड्रोन की आवाजाही के बीच भी इस कुत्ते के मन में कोई डर या घबराहट नहीं दिखती है। राहतकर्मियों ने उसे बिस्किट खिलाकर और अलग-अलग नामों से पुकारकर वहां से हटाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ।

आपदा के इस मंजर के बीच नेपाल सरकार ने वैश्विक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए हरित गैस का उत्सर्जन करने वाले देशों से इस तबाही के लिए जलवायु-संबंधी मुआवजे की मांग शुरू कर दी है। नेपाल का स्पष्ट तौर पर कहना है कि इस गंभीर आपदा के बाद अन्य देशों द्वारा दी जाने वाली सहायता को दान नहीं बल्कि उनकी नैतिक जिम्मेदारी माना जाना चाहिए। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बयान देते हुए कहा कि हम आज ऐसे वैश्विक जलवायु संकट की भारी कीमत चुका रहे हैं जिसे हमने खुद पैदा नहीं किया है।

इस बीच, नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने मंगलवार को देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों के लिए बाढ़ का नया और सख्त अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने और एहतियाती कदम उठाने की कड़ी अपील की है। नुवाकोट और रसुवा जिलों में अचानक बाढ़ आने की आशंका सबसे अधिक जताई गई है। इसके अलावा तालेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, खोटांग, ओखलढुंगा, रामेछाप, दोलखा, सिंधुपालचोक, काठमांडू घाटी के जिलों जैसे ललितपुर और भक्तपुर के साथ-साथ धादिंग में भी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने का खतरा बना हुआ है। वहीं पश्चिमी नेपाल के गोरखा, लमजुंग, डोल्पा, रुकुम पूर्व, रुकुम पश्चिम, जाजरकोट, दैलेख, बझांग और कंचनपुर के लिए भी प्रशासन की तरफ से विशेष चेतावनी जारी कर दी गई है ताकि किसी भी संभावित अनहोनी से समय रहते निपटा जा सके।