भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश भर में विशेष गहन पुनरीक्षण के संदर्भ में मतदाता सूची और चुनाव आयोग का लोगो दिख रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश भर में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है, जिसके अंतर्गत मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर संशोधन किया गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस पुनरीक्षण अभियान के तीनों चरणों को मिलाकर अब तक देश भर में लगभग 11 करोड़ वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी, सटीक और त्रुटिमुक्त बनाना है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

इस अभियान के तीसरे चरण के दौरान अकेले छह करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से बाहर किए गए हैं। इससे पहले के शुरुआती दो चरणों में पांच करोड़ से अधिक नाम हटाए गए थे, और अब फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद यह आंकड़ा 10 से 11 करोड़ के पार पहुंच गया है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि देश भर की वोटर लिस्ट में करीब 34 लाख नाम ऐसे दर्ज थे जो इस दुनिया में ही नहीं थे, यानी वे मृत पाए गए। इन सभी मृत मतदाताओं के नामों को सूचियों से हटा दिया गया है।

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र में सबसे बड़ी 'सफाई' देखने को मिली है। देश की राजधानी दिल्ली में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.56 लाख नाम हटाए गए हैं, जो कि कुल वोटरों का 32.7 प्रतिशत हिस्सा है। यह किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज की गई अब तक की सबसे ज्यादा कटौती दर है। इस भारी छंटनी के बाद अब दिल्ली की वोटर लिस्ट में केवल 97.53 लाख वोटर ही शेष बचे हैं, जबकि SIR अभियान से पहले यह संख्या लगभग 1.45 करोड़ हुआ करती थी। यानी दिल्ली के कुल मतदाताओं में से लगभग एक-तिहाई नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के पीछे मुख्य वजह लोगों का अनुपस्थित होना या स्थायी रूप से पते से चले जाना रहा है, जिसके कारण 43.32 लाख नाम हटाए गए। इसके अलावा, 2.82 लाख मृत लोगों के नाम और 1.41 लाख ऐसे नाम भी हटाए गए जो डुप्लिकेट यानी एक से अधिक जगहों पर दर्ज थे। अधिकारियों का मानना है कि राजधानी में अस्थायी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा होना इस उच्च कटौती दर का एक बड़ा कारण हो सकता है।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में भी आंकड़ों ने सबको चौंकाया है। महाराष्ट्र ने अपनी ड्राफ्ट लिस्ट जारी करते हुए बताया कि वहां SIR से पहले 9.78 करोड़ वोटर थे, जिनमें से कुल 2.07 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या के हिसाब से किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कटौती है, जिसकी दर 21.16 प्रतिशत दर्ज की गई है। पूरे देश के स्तर पर देखा जाए तो लगभग 1.54 करोड़ यानी 15.7 प्रतिशत नाम लोगों के अनुपस्थित मिलने या अपनी जगह बदलने के कारण हटाए गए हैं। इस बड़े पुनरीक्षण दौर के बाद अब केवल त्रिपुरा और नागालैंड ऐसे राज्य बचे हैं जिन्हें अपनी ड्राफ्ट लिस्ट जारी करनी है।

यदि आपका या आपके किसी परिचित अथवा परिवार के सदस्य का नाम इस नई ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग ने इसके लिए समय सीमा तय की है। नागरिक 30 सितंबर 2026 तक फॉर्म 6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद इन सभी दावों का निस्तारण 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाएगा, और अंत में 04 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा।