सबरीमाला मंदिर को मिले नए मुख्य पुजारी: पर्ची निकालकर हुआ चयन, अरीक्कारा सुब्रमण्यम शंकरन नंबूथिरी संभालेंगे कमान|
पथनमथिट्ठा में पर्ची निकालकर किए गए चयन में अरीक्कारा सुब्रमण्यम शंकरन नंबूथिरी को सबरीमाला और ई दामोदरन नंबूदरी को मलिकप्पुरम मंदिर का नया मुख्य पुजारी चुना गया है।
केरल के पथनमथिट्ठा स्थित सबरीमाला मंदिर में अनुष्ठान करते हुए लोग और नवनियुक्त मुख्य पुजारी शंकरन नंबूथिरी।
पथनमथिट्ठा: वार्षिक मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सत्र की शुरुआत से कुछ हफ्ते पहले रविवार को अरीक्कारा सुब्रमण्यम शंकरन नंबूथिरी को सबरीमला भगवान अयप्पा मंदिर के नए ‘मेलशांति’ (मुख्य पुजारी) के रूप में चुना गया है। इसके अलावा, सबरीमला मंदिर से करीब 100 मीटर दूर स्थित मलिकप्पुरम देवी मंदिर के नए मुख्य पुजारी के रूप में ई. दामोदरन नंबूदरी को चुना गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह चयन सुबह की पूजा के बाद पर्ची निकालकर किया गया। सबरीमला मंदिर के मुख्य पुजारी पद के लिए कुल सात नामों पर विचार किया गया था।
तिरुवनंतपुरम के रहने वाले शंकरन नंबूदरी वर्तमान में राज्य की राजधानी स्थित पझावंगडी गणपति मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। वहीं, कोझिकोड जिले के वडकरा के रहने वाले दामोदरन नंबूदरी वर्तमान में पय्योली के कीझूर स्थित भगवान शिव मंदिर के मुख्य पुजारी हैं।
ये दोनों नए पुजारी आगामी 16 नवंबर को एक साल के लिए अपना कार्यभार संभालेंगे। इसके ठीक एक दिन बाद मंडलम-मकरविलक्कु तीर्थयात्रा सत्र के लिए सबरीमला मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। अपने चयन पर खुशी जताते हुए शंकरन नंबूदरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनका चयन हो जाएगा।
शंकरन नंबूदरी ने बताया कि पिछले साक्षात्कारों में उनका नाम सूची में अंत में आता था, लेकिन इस बार उनका नाम सबसे पहले आया है। उन्होंने अपने इस चयन का पूरा श्रेय पझावंगडी गणपति मंदिर के भगवान गणपति को दिया, जहां वह पिछले पांच वर्षों से मेलशांति के रूप में सेवा दे रहे हैं।
अपनी चयन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने 2020 से पहले सबरीमला के लिए आवेदन किया था। साल 2020 से वह पझावंगडी गणपति मंदिर के मुख्य पुजारी हैं। इसके बाद उन्होंने आवेदन नहीं किया था क्योंकि यह मंदिर भारतीय सेना के प्रबंधन के अंतर्गत आता है और इसकी अपनी प्रक्रियाएं हैं, जिसके तहत अनुमति लेनी पड़ती है। इस बार उन्हें इसके लिए अनुमति मिल गई थी।
नंबूदरी ने अपनी पूजा-पद्धतियों और संस्कारों को सीखने का श्रेय अपने गुरुओं और पूर्वजों को भी दिया। जानकारी के लिए बता दें कि त्रिशूर के प्रसाद ई.डी. सबरीमला मंदिर के निवर्तमान मेलशांति हैं, जबकि कोल्लम के मनु नंबूदरी एम.जी. मलिकप्पुरम मंदिर के निवर्तमान मेलशांति हैं।