विपक्षी एकजुटता में दरार! स्टालिन ने कांग्रेस को घेरा, SIR के मुद्दे पर दोहरे मापदंड का लगाया आरोप|
डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, एसआईआर रद्द करने और मतपत्र से मतदान कराने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया है।
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन (बाएं) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (दाएं) का राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में संयुक्त दृश्य।
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुक (DMK) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। DMK प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने SIR के मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। एक तरफ जहाँ DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR को रद्द करने और चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर (मतपत्र) की वापसी की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पर हमला बोलते हुए विपक्षी खेमे में सियासी हलचल बढ़ा दी है।
DMK संसदीय दल की हालिया बैठक में पार्टी ने कुल चार प्रस्ताव पारित किए। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग, SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों को समर्थन देने की घोषणा और चुनाव सुधारों से जुड़ी मांगें शामिल हैं। इन प्रस्तावों के जरिए DMK ने कांग्रेस को एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि उसने जुलाई 2025 से ही SIR का विरोध करना शुरू कर दिया था। उस समय बिहार में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे। स्टालिन ने उस दौरान विपक्षी दलों द्वारा चलाए गए अभियान का समर्थन किया था और बिहार में आयोजित 'वोटर अधिकार यात्रा' में हिस्सा लिया था, जिसमें DMK की उप-महासचिव और सांसद कनिमोझी करुणानिधि भी उनके साथ मौजूद थीं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी ने SIR की खामियों और मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने का मुद्दा सबसे पहले उठाया था। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस ने इस प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी, हालांकि शुरुआत में पार्टी के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया था। इसके बाद 29 सितंबर को हुई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में भी राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से जुड़े खुलासों का श्रेय कांग्रेस के अभियान को दिया था और कहा था कि पार्टी की तथ्य-आधारित प्रस्तुतियों के कारण ही अब यह मुद्दा मीडिया और संपादकीय लेखों में प्रमुखता से चर्चा का विषय बना है।
हालांकि, DMK ने कांग्रेस के इन दावों पर कड़ा ऐतराज जताया है। DMK का कहना है कि SIR के खिलाफ लगातार चले विरोध प्रदर्शनों में उसकी भूमिका को किसी भी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। DMK सांसद ए. राजा ने कहा कि उनकी पार्टी संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह इस प्रक्रिया का लगातार विरोध करती रही है। उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी का दृष्टिकोण हर राज्य में एक जैसा क्यों नहीं है? DMK का आरोप है कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर तो इस प्रक्रिया का विरोध किया, लेकिन केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उसने उस तरह से आपत्तियां दर्ज नहीं कराईं। DMK का तर्क है कि यदि SIR के दौरान गड़बड़ियों या अनियमितताओं की आशंका है, तो ऐसी चिंताएं हर राज्य में समान रूप से लागू होनी चाहिए।
ए. राजा ने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर अपनी चिंताएं जताई थीं। इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने और इसके विरोध में प्रस्ताव पारित करने के लिए कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री चेन्नई भी आए थे। राजा के अनुसार, पार्टी के नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य SIR के खिलाफ DMK द्वारा किए गए विरोध के पूरे घटनाक्रम को देश के सामने रखना है।
अपनी बात रखते हुए DMK ने बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभवों का भी जिक्र किया। पार्टी ने 15 नवंबर 2025 को चुनाव परिणाम आने के बाद एम.के. स्टालिन द्वारा की गई उन टिप्पणियों की याद दिलाई, जिनमें उन्होंने विपक्षी गठबंधन के अंदरूनी मतभेदों और कमियों पर सवाल उठाए थे। इनमें गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर हुई खींचतान, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला और कुछ सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस व वामपंथी दलों के प्रत्याशियों का एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरना शामिल था। DMK के इस रुख से साफ उजागर होता है कि भले ही SIR के खिलाफ विपक्षी दल एक साथ विरोध दर्ज करा रहे हों, लेकिन राजनीतिक श्रेय लेने और चुनावी रणनीति को लेकर उनके बीच मतभेद बरकरार हैं।
संस्थागत मोर्चे पर DMK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाने और उनके आचरण की जांच कराने की मांग रखी है। DMK का आरोप है कि SIR की आड़ में योग्य और वैध मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा बना हुआ है, इसलिए चुनाव आयोग की सीधी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने ध्यान दिलाया कि जब 27 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयोग ने तमिलनाडु समेत 12 राज्यों में SIR कराने का ऐलान किया था, तब स्टालिन ने तमिलनाडु में इसे लागू करने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने उस दौरान मानसून और त्योहारों के मौसम का हवाला देते हुए नवंबर व दिसंबर के महीनों में पुनरीक्षण कार्य चलाने का विरोध किया था।
इसके साथ ही, DMK ने SIR के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र संगठनों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का खुलकर समर्थन किया है। CJP नेताओं की गिरफ्तारी के समय भी DMK उनके समर्थन में खड़ी नजर आई। DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने चेन्नई में हुए विरोध प्रदर्शनों में खुद हिस्सा लिया और पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि स्टालिन और DMK उन सभी लोगों और संगठनों के साथ मजबूती से खड़े हैं जो SIR के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
अंत में, DMK द्वारा पारित प्रस्तावों में SIR प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रद्द करने, आने वाले चुनावों में इस रिवीजन से पहली वाली पुरानी मतदाता सूची का उपयोग करने और EVM को हटाकर पारंपरिक बैलेट पेपर (मतपत्र) से मतदान कराने की मांग की गई है। DMK ने घोषणा की है कि उसके सभी सांसद इन मांगों को लेकर जल्द ही देश के राष्ट्रपति को एक आधिकारिक याचिका सौंपेंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR के खिलाफ विपक्षी दलों का यह आंदोलन आने वाले समय में क्या मोड़ लेता है और DMK व कांग्रेस के बीच का यह ताजा मतभेद विपक्षी एकजुटता को किस हद तक प्रभावित करता है।