कोलकाता में मौसम की बेरुखी: पूजा पंडाल में अचानक झमाझम बारिश के बाद कीचड़ में फिसले श्रद्धालु, मची अफरा-तफरी
चीनौर रोड स्थित शीतला माता मंदिर के पास धान से लदे ट्रक ने बैरिकेड्स तोड़कर श्रद्धालुओं को कुचला, प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए।
ग्वालियर के चीनौर रोड पर शीतला माता मंदिर के पास हादसे के बाद जुटी भीड़ और सड़क पर बिखरीं धान की बोरियां।
कोलकाता के मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट स्थित चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम को एक अप्रत्याशित घटना घटी, जब अचानक हुई बारिश के कारण वहां भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई और कई लोग घायल हो गए। शनिवार शाम को शहर में अचानक तेज बारिश शुरू हुई, जो देखते ही देखते मूसलाधार रूप ले चुकी थी और लगभग एक घंटे तक जारी रही। शुरुआत हल्की बूंदाबांदी से हुई थी, लेकिन जल्द ही बारिश तेज होने पर लोग खुद को बचाने के लिए पंडाल के अंदर भागने लगे। पंडाल के अंदर और बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जहाँ ज्यादातर लोग बारिश के कम होने का इंतजार कर रहे थे। मौसम विभाग ने शनिवार तक केवल रुक-रुककर हल्की बूंदाबांदी होने का अनुमान जताया था, लेकिन मौसम के इस अचानक बदलाव ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी।
मौसम विज्ञान के उप महानिदेशक एच. आर. बिस्वास ने जानकारी दी कि यह स्थिति 'रिट्रीटिंग वेज' या लौटते मानसून के प्रभाव के कारण बनी, जिससे रुक-रुककर तेज बारिश हुई। हालांकि मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और रविवार से मौसम साफ रहने की उम्मीद जताई गई थी, फिर भी शनिवार को कोलकाता में दो बार तेज बारिश दर्ज की गई। दोपहर में हुई बारिश अपेक्षाकृत हल्की थी, लेकिन शाम को हुई बारिश काफी देर तक लगातार होती रही। यह बारिश भले ही बहुत भारी न रही हो, लेकिन यह 45 मिनट से ज्यादा समय तक तेज बनी रही। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि लगातार बारिश होने की वजह से मैदान की जमीन पूरी तरह गीली और कीचड़युक्त हो गई। जमीन पर कीचड़ होने के कारण लोगों का पैर टिकना मुश्किल हो गया, जिससे फिसलने की वजह से वहां भगदड़ मच गई।
जिस दिन लाखों लोग दुर्गा पूजा के अवसर पर सड़कों पर निकले थे, उस दिन इस बारिश ने पूजा के पूरे माहौल को प्रभावित कर दिया। इस घटना के बाद पूजा में शामिल हुए लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि कहीं दोबारा बारिश न आ जाए। हालांकि मौसम विभाग ने स्पष्ट किया कि रविवार से मौसम पूरी तरह साफ रहेगा और कम से कम 21 अक्टूबर (दशमी) तक ऐसा ही बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक क्षेत्र में मध्यम या भारी बारिश होने की संभावना न के बराबर है और अब ऐसी बारिश दोबारा नहीं होगी।
तकनीकी रूप से मौसम विज्ञान में 'रिट्रीटिंग वेज' का तात्पर्य 'कोल्ड एयर डैमिंग' (CAD) घटना के कमजोर होने और खत्म होने के चरण से होता है। 'वेज' ठंडी हवा की एक उथली और घनी परत होती है, जो किसी पर्वत श्रृंखला (जैसे अमेरिका में अप्पलाचियन पर्वत के पूर्वी हिस्से में) के पास फंस जाती है। जब यह वायु राशि पीछे हटती है, तो इसका मतलब है कि जिस मौसम प्रणाली के कारण यह स्थिति बनी थी, वह अब दूर जा रही है। इससे ठंडी और स्थिर परत छंट जाती है और उस क्षेत्र का तापमान वापस सामान्य हो जाता है। चोरबागान पंडाल में हुई इस घटना ने प्रशासनिक तैयारियों और मौसम के अचानक आए बदलाव के बीच श्रद्धालुओं के लिए कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना दिया था।