गया के गांधी मैदान में विजयादशमी पर रावण दहन के लिए खड़े किए गए रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले।

बिहार के गयाजी स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में इस बार दशहरा का पर्व बेहद खास और अलग अंदाज में मनाया जा रहा है। शहर के इस प्रसिद्ध मैदान में रावण दहन के कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी तरह से जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार के आयोजन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशालकाय पुतले बनकर तैयार हो चुके हैं। कारीगरों ने पिछले दिनों इन सभी पुतलों को पूरी तरह से अंतिम रूप दे दिया है।

इस बार के रावण दहन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लंका दहन के दौरान पहली बार इलेक्ट्रॉनिक पटाखों का इस्तेमाल किया जाएगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को ध्यान में रखते हुए सभी पटाखों को पुतलों की ऊंचाई पर लगाया गया है, जिन्हें बिजली के तारों के जरिए पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जलाया जाएगा। इस नई तकनीक से रावण वध के दौरान पटाखों को नियंत्रित तरीके से चलाने में बहुत मदद मिलेगी।

खास बात यह है कि गांधी मैदान में तैयार हो रहे इन सभी भव्य पुतलों को गया के ही रहने वाले मोहम्मद जफर आलम ने अपनी देखरेख में तैयार किया है। कारीगर जफर आलम पिछले 36 वर्षों से लगातार हर साल गांधी मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले बनाते आ रहे हैं। उनके लिए दशहरा का यह काम सिर्फ एक रोजगार भर नहीं है, बल्कि यह देश की गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक सौहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश करता है। जफर आलम का कहना है कि वे पिछले 36 साल से लगातार इस परंपरा से जुड़े हुए हैं और गया में आपसी भाईचारे के साथ विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर इस पर्व की तैयारियों में अपना योगदान देते हैं।

कारीगर मोहम्मद जफर आलम ने जानकारी दी है कि हर साल दशहरा के आने से करीब एक महीने पहले ही पुतले बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे लकड़ी, कागज और अन्य जरूरी सामग्री का उपयोग करके इन पुतलों को आकार दिया जाता है। इस बार भी तीनों पुतलों को तय माप और ऊंचाई के हिसाब से तैयार किया गया है। इसके तहत रावण का पुतला 60 फीट ऊंचा, कुंभकरण का पुतला 55 फीट ऊंचा और मेघनाथ का पुतला 50 फीट ऊंचा बनाया गया है।

गया के गांधी मैदान में होने वाले इस भव्य लंका दहन और रावण वध के आयोजन की जिम्मेदारी श्री दशहरा चैरिटेबल ट्रस्ट कमेटी की ओर से संभाली जा रही है। इस बार के इस बड़े आयोजन में लगभग 60 से 65 हजार लोगों के तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इतनी भारी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ट्रस्ट कमेटी के मीडिया प्रभारी रंजीत ब्रह्मपुरिया ने इस संबंध में बताया कि गांधी मैदान के अंदर बैरिकेडिंग का सारा काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा दर्शकों की सुविधा के लिए इस बार पिछले साल की तुलना में लाइटिंग की व्यवस्था को भी काफी बेहतर बनाया गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत पूरे गांधी मैदान में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी तरह के असामाजिक तत्वों और हुड़दंग करने वाले लोगों पर पैनी नजर रखी जा सके। साथ ही, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भीड़ की आसानी से निकासी के लिए मैदान के सभी गेटों को खुला रखा जाएगा।