पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ऑर्डनेंस फैक्ट्री में ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे लॉइटरिंग म्यूनिशन का निरीक्षण कर रहे हैं।

पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और रणनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में सामने आई कुछ तस्वीरों से यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान की ऑर्डनेंस फैक्ट्री में ईरान के कुख्यात 'शाहेद' किलर ड्रोन की डिजाइन से प्रेरित एक नया लॉइटरिंग म्यूनिशन विकसित किया जा रहा है। इस बात की पुष्टि पिछले महीने के आखिर में तब हुई जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) ने पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री का दौरा किया। इस दौरे के दौरान सैन्य अधिकारियों को शाहेद-136 जैसे उन्नत कॉन्सेप्ट वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जो पाकिस्तान की रक्षा इकाई में बन रहा इस तरह का कम से कम दूसरा हथियार है।

हालांकि इस नए हथियार की वास्तविक रेंज कितनी होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इसके जरिए पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता को बढ़ाने की कोशिश में है। पाकिस्तानी सेना की योजना अपनी स्ट्राइक कैपिसिटी को मजबूत करने के लिए 2000 से 3000 किलोमीटर की रेंज वाले म्यूनिशन तैयार करने की है, जिसमें कम लागत वाले पिस्टन-पावर्ड वन-वे-अटैक ड्रोन एक अहम भूमिका निभाते हैं। यदि इस क्षमता का विकास पूरी तरह हो जाता है, तो इसके दायरे में भारत के मुंबई और दिल्ली समेत देश के लगभग सभी प्रमुख शहर आ सकते हैं, जिससे रणनीतिक तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए चिंताएं बढ़ सकती हैं।

आपको बता दें कि 'शाहेद-136' मूल रूप से ईरान में निर्मित एक खतरनाक किलर ड्रोन है, जिसे आत्मघाती या 'कामिकेज' ड्रोन भी कहा जाता है। यह ड्रोन अपने साथ भारी मात्रा में विस्फोटक लेकर सीधे अपने लक्ष्य से टकराकर नष्ट हो जाता है। इसकी मारक क्षमता आमतौर पर 1000 किलोमीटर से 2500 किलोमीटर के बीच आंकी गई है। इस ड्रोन को पहली बार साल 2021 में दुनिया के सामने पेश किया गया था और वर्तमान में रूसी सेना द्वारा इसका व्यापक रूप से यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोही भी साल 2020 में इसका उपयोग कर चुके हैं, और रूस ने ईरान से भारी संख्या में इन ड्रोन्स का आयात किया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान का उद्देश्य रूस, यूक्रेन और ईरान की तरह बड़े पैमाने पर आक्रामक सैन्य रणनीतियों को अपनाना है, तो उसकी सेना इन लंबी दूरी के किलर ड्रोन्स का भारी स्टॉक तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इससे युद्ध की स्थिति में इनकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। पाकिस्तान इसके लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशीकरण के माध्यम से घरेलू उत्पादन पर जोर दे रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान की नजरें यूक्रेनी तकनीक पर भी टिकी हुई हैं, जहां एक प्राइवेट पाकिस्तानी कंपनी यूक्रेन की फायर पॉइंट टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर यूक्रेनी 'FP-1' ड्रोन के सह-उत्पादन और विपणन को लेकर बातचीत कर रही है।