प्रार्थना सभा में मौजूद लोग और पुस्तकें लखनऊ के मोहनलालगंज में धर्मांतरण के आरोपों के संदर्भ में दिखाई दे रही हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके से धर्मांतरण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मकान के अंदर अवैध रूप से चर्च चलाया जा रहा था, जहां गरीब ग्रामीणों को तरह-तरह के लालच देकर धर्म बदलने के लिए उकसाया जा रहा था। इस बात की भनक लगते ही हिंदू संगठनों ने मौके पर पहुंचकर जबरदस्त हंगामा किया। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पादरी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

यह पूरी घटना मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भदेशवा गांव की है। रविवार दोपहर को बजरंग दल और श्री राम सनातन सेवा समिति के कार्यकर्ताओं को यह सूचना मिली थी कि सिसेंडी के रायपुर भदेशवा गांव में एक मकान के भीतर अवैध रूप से चर्च का संचालन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता तुरंत मौके पर पहुंच गए और वहां छापेमारी कर दी। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस अवैध प्रार्थना सभा की आड़ में गरीब और भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इस हंगामे के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

मौके पर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने वहां मौजूद पादरी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान चंद्रिका प्रसाद के रूप में हुई, जो दौधन खेड़ा बरौली खलीलाबाद का रहने वाला है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह पादरी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल करता था ताकि किसी को शक न हो। छापेमारी के दौरान संगठन के लोगों को वहां से एक डायरी और कुछ धार्मिक पुस्तकें मिलीं। इस डायरी की जांच करने पर उसमें जो खुलासे हुए, वे हैरान करने वाले थे। आरोप है कि डायरी में गरीब लोगों को दो बकरी देने और उनके घरों में पानी की टंकी बनवाने जैसे कई लालच देने की बातें लिखी हुई थीं।

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय मोहनलालगंज थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए पादरी और वहां मौजूद कुछ अन्य लोगों को अपनी हिरासत में ले लिया और उन्हें थाने ले आई। हालांकि, इसके बाद थाने के बाहर एक नया विवाद खड़ा हो गया। जब बजरंग दल के कार्यकर्ता इस मामले में लिखित शिकायत या तहरीर देने पहुंचे, तो उनका आरोप था कि पुलिस टालमटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि पुलिस यह कह रही है कि संगठनों की तरफ से दी गई तहरीर मान्य नहीं होगी और जब तक कोई पीड़ित व्यक्ति खुद सामने आकर शिकायत नहीं करता, तब तक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। हिंदू संगठनों ने पुलिस के इस रवैये पर गहरी नाराजगी जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर जब मोहनलालगंज थाना प्रभारी से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि जिस मकान को लेकर यह हंगामा हुआ है, वहां साल 2009-10 से ही चर्च संचालित हो रहा है। घटना के समय भी वहां चार से पांच लोग मौजूद थे जो शांतिपूर्वक प्रार्थना कर रहे थे। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में वहां मौजूद लोगों ने यह बयान दिया है कि वे किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से प्रार्थना सभा में शामिल होने आए थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस मामले में किसी भी पीड़ित की तरफ से कोई लिखित या औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का यह भी कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।