सुप्रीम कोर्ट की इमारत के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करते वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुख्य न्यायाधीश।

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने देश के सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद टूटने की बात कहते हुए बड़ा बयान दिया है। शनिवार को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस द्वारा लगाई गई रोक के जवाब में बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बार-बार कोर्ट जाने से वे अब थक चुके हैं। सिब्बल ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाकर थक गए हैं और अब उन्हें भारत के सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा उम्मीद नहीं बची है। उनका मानना है कि अगर इस समय कोई देश के संविधान को बचा सकता है, तो वह केवल भारत का सुप्रीम कोर्ट ही है, लेकिन बार-बार जाने के बावजूद उन्हें नहीं लगता कि वहां जाने का अब कोई फायदा है।

वोटर लिस्ट में बदलाव और वोट-चोरी से जुड़ी कार्यवाही का जिक्र करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)' प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं के बारे में सुप्रीम कोर्ट को बार-बार जानकारी दी गई थी। उन्होंने कोर्ट के समक्ष महीनों तक दलीलें दीं कि वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाए और जोड़े जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अदालत की ओर से कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अब बंगाल अपीलेट ट्रिब्यूनल ने तय की गई अपीलों में से 93% मामलों में वोटरों के नाम बहाल कर दिए हैं। इस आंकड़े से यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि लिस्ट से ज्यादातर नाम गलत तरीके से हटाए गए थे। सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस बात की जानकारी होनी चाहिए थी, फिर भी कोई हस्तक्षेप या राहत नहीं दी गई, इसलिए उनका भरोसा डगमगाया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब कपिल सिब्बल से यह पूछा गया कि क्या वे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से असंतुष्ट हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे न तो संतुष्ट हैं और न ही असंतुष्ट। उन्होंने वकीलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक वकील होने के नाते उनके संतुष्ट या असंतुष्ट होने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उनका काम लोगों के केस लड़ना है। जब भी समाज में या लोगों के साथ अन्याय होता है, तो उन्हें याचिका दायर करनी ही पड़ती है, चाहे कोर्ट उस पर सुनवाई करे या न करे। उन्होंने अंत में दोहराया कि देश के लोगों को लगता है कि वर्तमान स्थिति में बदलाव होना चाहिए और जो होना है वह होकर रहेगा, लेकिन लगातार अदालती चक्कर काटने के बाद भी न्याय न मिलने से वे व्यक्तिगत रूप से निराश और थके हुए महसूस कर रहे हैं।