विदेश मंत्री एस. जयशंकर नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कूटनीतिक मामलों पर चर्चा करते हुए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंधों को लेकर स्पष्ट और दो टूक बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि किसी भी रिश्ते के कामयाब होने के लिए यह जरूरी है कि उसमें दोनों पक्षों का आपसी फायदा हो। यह टिप्पणी उन्होंने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बनी अनिश्चितता के संदर्भ में दी, जहां उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसी उम्मीद नहीं करते कि पड़ोसी देश सिर्फ भारत के हित में काम करें, बल्कि आपसी सहमति से ही रिश्ते आगे बढ़ सकते हैं।

बांग्लादेश की ओर से इस यात्रा के लिए शेख हसीना के प्रत्यर्पण जैसी कई शर्तें रखी गई थीं, जबकि पिछले दिनों एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस भी विवाद का मुद्दा रही थी। इसके साथ ही, पाकिस्तान पर बात करते हुए जयशंकर ने ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम में दो टूक कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार देश की जनता की भावनाओं और राय को कभी नजरअंदाज नहीं कर सकती।

चीन के साथ संबंधों पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश रिश्तों में स्थिरता बनाए रखने के इच्छुक हैं और भारत को वैश्विक स्तर पर व्यापार करने की आवश्यकता है। आगामी एससीओ और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात की संभावना है, जो 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। उन्होंने माना कि इस संवाद का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण और क्षमताओं का विकास करना है, जिसके तहत व्यापार और आर्थिक लेन-देन भी शामिल हैं।

अंत में, जयशंकर ने वर्ष 2020 से 2024 के मुश्किल दौर को याद करते हुए दोहराया कि सीमा की वर्तमान स्थिति ही भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेगी। हालांकि, यदि सीमा पर हालात स्थिर रहते हैं और आपसी सहयोग का सकारात्मक माहौल बनता है, तो दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के लिए बड़े बाजार के रूप में बेहतर अवसर प्रदान कर सकती हैं।