लखीसराय अशोक धाम में भगदड़ की आंखों देखी, टूट गई बांस की बैरिकेडिंग, चश्मदीद ने बताया पूरा घटनाक्रम|
लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में मची भगदड़ के चश्मदीद विनोद कुमार ने बैरिकेडिंग टूटने और अफरा-तफरी का आंखों देखा हाल बयां किया है।
बिहार के लखीसराय में स्थित अशोक धाम मंदिर में मची भगदड़ के बाद चश्मदीद विनोद कुमार मीडियाकर्मियों को घटना की जानकारी देते हुए नजर आ रहे हैं।
लखीसराय: बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में भगदड़ के दौरान वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई। हादसे के एक प्रत्यक्षदर्शी विनोद कुमार ने उस समय की स्थिति के बारे में बताया। उनके मुताबिक, मंदिर पहुंचने से पहले ही रास्ते में एक बिजली का पोल गिरने से लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बनी। इसके बाद जब श्रद्धालु मंदिर के प्रवेश द्वार की ओर बढ़े तो भीड़ अचानक बढ़ गई और बैरिकेडिंग टूट गई।
विनोद कुमार ने बताया कि वह ट्रेन से उतरने के बाद मंदिर में दर्शन के लिए कतार में लगे थे। कुछ समय बाद लाइन आगे बढ़ने लगी। इसी दौरान रास्ते में एक बिजली का पोल टूटकर गिर गया। इससे वहां मौजूद लोगों के बीच घबराहट की स्थिति पैदा हो गई। लोग किसी तरह वहां से आगे बढ़े और मंदिर के प्रवेश द्वार की तरफ जाने लगे।
प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, मंदिर के गेट के पास महिला श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। इस स्थान पर भीड़ ज्यादा जमा हो गई थी। वहां महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं, लेकिन अचानक बढ़ती भीड़ के बीच स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया।
विनोद ने बताया कि कुछ लोग आगे जाने के लिए जबरदस्ती प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। कुछ श्रद्धालु बैरिकेडिंग के ऊपर से निकलने लगे। इसी दौरान बांस की बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। कई लोग मदद के लिए डॉक्टरों और प्रशासन से गुहार लगाने लगे। विनोद के मुताबिक, उस समय उन्हें लगा कि भीड़ बहुत ज्यादा नहीं थी, लेकिन मंदिर के प्रवेश के दौरान अचानक स्थिति बिगड़ गई।
हादसे को लेकर लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने भी भीड़ बढ़ने की जानकारी दी। उनके अनुसार, प्रशासनिक अधिकारी रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे से ही मौके पर मौजूद थे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगातार व्यवस्था की जा रही थी।
डीएम ने बताया कि सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। रविवार शाम करीब साढ़े छह से पौने सात बजे के बीच दो ट्रेनों के ठहराव के कारण मंदिर आने वाले लोगों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ। इसके बाद भीड़ को संभालने की चुनौती बढ़ गई।
प्रत्यक्षदर्शी के बयान और जिलाधिकारी की जानकारी से यह सामने आता है कि मंदिर परिसर में प्रवेश के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ी। एक ओर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, वहीं दूसरी ओर प्रवेश के स्थान पर लोगों के आगे बढ़ने की कोशिश के बीच बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अशोक धाम मंदिर में हुई इस घटना ने मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से हादसे के दौरान की स्थिति की तस्वीर सामने आई है, जबकि प्रशासन की ओर से घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आना बाकी है।