विमान में राहत सामग्री लादते लोग और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र, नेपाल संकट के संदर्भ में।

पड़ोसी देश नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के इस संकटपूर्ण दौर में भारत सरकार द्वारा लगातार त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई भयंकर बाढ़ के कारण भारी तबाही मची है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। इस आपदा के बीच चीन की तरफ फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारत का विदेश मंत्रालय पूरी तत्परता के साथ सक्रिय है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, चीन की तरफ फंसे 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं, जिससे उनके स्वजनों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि चीन की सीमा को पार करके नेपाल पहुंचने वाले इन 149 भारतीय नागरिकों की सूची जारी कर दी गई है। ये सभी नागरिक शुक्रवार को नेपाल पहुंचे हैं। इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी गई थी कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह से लगभग 400 भारतीय नागरिक चीन की तरफ फंसे हुए थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि इनमें से 96 भारतीय नागरिक पूरी तरह सुरक्षित तरीके से सड़क मार्ग के जरिए नेपाल पहुंचे हैं, जबकि नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू होते हुए 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार दोपहर को सुरक्षित नई दिल्ली भी वापस लौट आए हैं।

संकट की इस घड़ी में भारत ने पड़ोसी देश नेपाल को मानवीय सहायता प्रदान करने का सिलसिला जारी रखते हुए शुक्रवार को राहत सामग्री की तीसरी खेप रवाना की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि नई दिल्ली ने पहले ही बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी थी, जिसके बाद गुरुवार को 37.5 टन राहत सामग्री की एक और बड़ी खेप भेजी गई थी। शुक्रवार को भेजी गई तीसरी खेप के तहत 10 टन अतिरिक्त राहत सामग्री, 11 चिकित्सा और पैरामेडिकल कर्मचारियों की एक विशेष टीम तथा सुरंग में चलाए जाने वाले बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए एक रेकी दल को काठमांडू के लिए रवाना किया गया है। इस तीसरी उड़ान में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाने के पैकेट और पानी को साफ करने वाली आवश्यक गोलियां भी शामिल हैं।

हालांकि राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन इस आपदा के कारण अब भी चिंताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय नागरिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय मूल के लगभग 100 ऐसे लोग भी हैं जिनसे संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है। अनुमान है कि ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं और उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है। नेपाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बुधवार को आई अचानक बाढ़ की वजह से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 538 हो गई है।

भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए नेपाल को एनडीआरएफ (NDRF) की टीम भेजने की भी औपचारिक पेशकश की है और अब इस पर नेपाल सरकार के आधिकारिक जवाब का इंतजार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि भारत सरकार काठमांडू प्रशासन को राहत, बचाव और पुनर्वास के हरसंभव प्रयास में पूरी मदद देने के लिए लगातार तैयार है, ताकि इस बड़ी त्रासदी से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।