आतंकियों से भिड़ा जांबाज ‘टाइसन’, गोली लगने के बाद भी नहीं रुका; सेना ने दिया खास सम्मान|
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान गोली लगने के बावजूद असाधारण साहस दिखाने वाले सेना के डॉग टाइसन को 'मेंशन-इन-डिस्पैचेस' से सम्मानित किया गया।
भारतीय झंडे के पास खड़े सेना के असॉल्ट डॉग टाइसन, जिन्हें जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान बहादुरी दिखाने पर 'मेंशन-इन-डिस्पैचेस' सम्मान मिला है।
भारतीय सेना ने अपने 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज के शूरवीर असॉल्ट डॉग 'टाइसन' की असाधारण बहादुरी और अदम्य साहस को मान्यता देते हुए उसे सम्मानित किया है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक बेहद जोखिम भरे अभियान के दौरान टाइसन ने जो वीरता दिखाई, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन का मुकाबला करने वाले इस जर्मन शेफर्ड श्वान को इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित 'मेंशन-इन-डिस्पैचेस' (MiD) सम्मान से नवाजा गया है।
घटना इस साल 22 फरवरी की है, जब जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चत्रू इलाके में आतंकवादियों के सफाए के लिए 'ऑपरेशन त्रशी-I' चलाया जा रहा था। इस अभियान के दौरान टाइसन सैनिकों के सबसे आगे रहकर रास्ते की टोह ले रहा था और उसने सुरक्षा बलों को आतंकवादियों के एक छिपे हुए ठिकाने का सटीक पता लगाया। आतंकवादियों के ठिकाने के भीतर प्रवेश करते समय सबसे आगे रहते हुए टाइसन को पहली गोली लगी, लेकिन इतनी गंभीर चोट लगने के बाद भी उसका हौसला नहीं टूटा। अपनी शारीरिक पीड़ा को नजरअंदाज करते हुए वह लगातार आगे बढ़ता रहा और उसने ऐसा आक्रामक रुख अपनाया कि आतंकवादी घबराकर गोली चलाने पर मजबूर हो गए, जिससे उनकी सटीक मौजूदगी का खुलासा हो गया।
टायसन की इस निडर और साहसी कार्रवाई के परिणामस्वरूप व्हाइट नाइट कॉर्प्स के सैनिकों, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को पाकिस्तान-समर्थित तीन कुख्यात आतंकवादियों को प्रभावी ढंग से घेरकर ढेर करने में बड़ी सफलता मिली। पैर में गंभीर रूप से गोली लगने के बावजूद टायसन ने अपने कर्तव्य पथ से पीछे कदम नहीं हटाया। घायल होने के तुरंत बाद उसे आपातकालीन चिकित्सा के लिए उधमपुर स्थित कमांड अस्पताल पहुंचाया गया, जहां बेहतर इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। भारतीय सेना ने उसकी इस निष्ठा की सराहना करते हुए उसे एक 'सच्चा योद्धा और सैनिक' करार दिया है।
आपको बता दें कि टायसन सेना के विशेष असॉल्ट डॉग दस्ते का हिस्सा है, जिन्हें अत्यंत जोखिम भरे ऑपरेशनों के लिए सैनिकों की तर्ज पर कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य ऐसे कठिन क्षणों में सैनिकों की मदद करना होता है जहां इंसानी जीवन को तुरंत बड़ा खतरा हो सकता है। वे छिपे हुए आतंकवादियों, हथियारों और दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आतंकवाद-विरोधी अभियानों में मिलिट्री डॉग्स के इस योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने के लिए 'मेंशन-इन-डिस्पैचेस' एक बेहद प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान है। इस साल इस सम्मान के लिए चुने गए कुल 89 कर्मियों की सूची में टाइसन इकलौता पशु नायक है, जो यह साबित करता है कि मातृभूमि की रक्षा में इंसानों के साथ-साथ हमारे मूक सैनिक भी पीछे नहीं हटते।