1971 में दुश्मन के घर पहुंची 'सहमत', भारत के लिए बनी जासूस, INS विक्रांत को बचाने में निभाई अहम भूमिका|
1971 के युद्ध के दौरान एक कश्मीरी युवती ने पाकिस्तानी सैन्य परिवार में विवाह कर भारत के लिए जासूसी की थी।
आईएनएस विक्रांत और विवाह के संदर्भ में कलात्मक रूप से तैयार की गई तस्वीर, जो कि कश्मीरी जासूस सहमत की कहानी को दर्शाती है।
यह एक ऐसी कश्मीरी युवती की अदम्य साहस और देशभक्ति की दास्तान है, जिसका असली नाम आज भी दुनिया के सामने नहीं आया है, लेकिन इतिहास और साहित्य के पन्नों में उसे 'सहमत' के नाम से अमर कर दिया गया है। यह कहानी वर्ष 1971 के उस दौर की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के बादल मंडरा रहे थे। जम्मू-कश्मीर के एक इलाके में अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुकी एक युवा लड़की की जिंदगी तब पूरी तरह बदल गई, जब उससे भारतीय सेना के एक खुफिया अधिकारी ने संपर्क किया। देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित से जुड़े इस मिशन पर लंबी चर्चा के बाद, उस साधारण सी दिखने वाली युवती ने एक ऐसा खतरनाक रास्ता चुना, जिसमें कदम-कदम पर मौत का खतरा था। उसने दुश्मन देश यानी पाकिस्तान की सेना के एक उच्च अधिकारी के घर में ब्याह रचाया और चुपचाप भारत के लिए जासूसी करने का कठिन फैसला लिया।
इस असाधारण और सच्ची घटना को दुनिया के सामने लाने वाले पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी और लेखक हरिंदर सिक्का थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'कॉलिंग सहमत' में इस जांबाज महिला के संघर्षों को विस्तार से दर्ज किया है। लेखक के अनुसार, 1971 के युद्ध के कई साल बाद उन्होंने इस असल महिला को खोज निकाला था। उनकी सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए उनकी असली पहचान आज भी गुप्त रखी गई है। किताब में जिस नाम 'सहमत' का इस्तेमाल किया गया है, वह भी लेखक द्वारा उनकी पहचान छिपाने के लिए रखा गया एक काल्पनिक नाम था। उनकी इसी रोमांचक और प्रेरणादायक जीवन गाथा से प्रेरित होकर बॉलीवुड में वर्ष 2018 में 'राजी' फिल्म का निर्माण भी किया गया था, जिसमें मुख्य किरदार अभिनेत्री आलिया भट्ट ने निभाया था।
हरिंदर सिक्का के मुताबिक, वह युवती कॉलेज में पढ़ने वाली एक सामान्य कश्मीरी लड़की थी, जिसके पिता का दिल पूरी तरह से भारत के हितों के प्रति समर्पित था। जब 1971 की जंग नजदीक आ रही थी, तब उसने देश के खातिर एक बहुत बड़ा जोखिम उठाने की ठानी। उसने एक सीनियर पाकिस्तानी मिलिट्री ऑफिसर के बेटे के साथ निकाह किया और उनके परिवार के साथ पाकिस्तान जा कर रहने लगी। बाहरी दुनिया और परिवार के लिए वह केवल एक नई नवेली दुल्हन थी, लेकिन उसके भीतर का जज्बा देश के लिए काम करने का था। उसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सेना के भीतर से महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां जुटाना और उन्हें बेहद गुप्त तरीके से भारतीय खुफिया एजेंसियों तक पहुंचाना था।
इस रहस्यमयी और साहसी महिला के बारे में लेखक हरिंदर सिक्का को पहली बार वर्ष 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान पता चला था। भारतीय सेना के एक अधिकारी ने उन्हें अपनी मां के बारे में बताते हुए साझा किया था कि कैसे उनकी मां ने पाकिस्तानी सैन्य परिवार में शादी करके भारत के लिए जासूस के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इस बातचीत के बाद, सिक्का ने लंबी तलाश के बाद उस महिला को ढूंढ निकाला और पंजाब के मलेरकोटला शहर में जाकर उनसे मुलाकात की। उनके अनुभवों को सुनकर उनकी बहादुरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस पूरी कहानी का सबसे रोमांचक और देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित एयरक्राफ्ट कैरियर 'आईएनएस विक्रांत' (INS Vikrant) से जुड़ा हुआ है। 'कॉलिंग सहमत' और लेखक के बयानों के अनुसार, उस जांबाज महिला ने पाकिस्तान के भीतर रहकर भारतीय नौसेना के खिलाफ रची जा रही साजिशों और रणनीतियों की भनक पा ली थी। उसकी खुफिया रिपोर्ट में इस बात के पुख्ता संकेत थे कि पाकिस्तानी सेना 'आईएनएस विक्रांत' को निशाना बनाने की बड़ी योजना बना रही है। अपनी जान जोखिम में डालकर उसने समय रहते यह बेहद संवेदनशील जानकारी भारत तक पहुंचाई, जिससे भारतीय नौसेना को समय रहते जरूरी एहतियात बरतने और इस बड़े खतरे को टालने का अवसर मिल गया।
अपना यह खतरनाक और देशसेवा का मिशन सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, वह महिला वापस भारत लौट आई और पूरी तरह से लाइमलाइट या प्रचार से दूर सादगी भरा जीवन बिताने लगीं। बाद में हरिंदर सिक्का ने उनसे मुलाकात की और अपनी पुस्तक के लिए उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को लिपिबद्ध किया। उनके अनुसार, युद्ध के उस खौफनाक दौर और जासूसी के तनाव ने उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला था। यह सफर केवल रोमांच या जासूसी के ग्लैमर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें हर पल का डर, अपनों से दूरी, अकेलापन और इस तरह के मिशन के नतीजों का भारी बोझ भी शामिल था। यह देशप्रेम की ऐसी अनूठी मिसाल है कि उनके अपने बेटे भी आगे चलकर भारतीय सेना में अधिकारी बने और देश की सेवा की।