राहुल गांधी के गले मिलने' की राजनीति वाले बयान से गरमाई सियासत, निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी-फिडेल कास्त्रो का वीडियो दिखाकर घेरा |
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का पुराना वीडियो शेयर कर राहुल गांधी के विदेश नीति वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो का पुराना वीडियो फुटेज निशिकांत दुबे द्वारा शेयर किए जाने के संदर्भ में।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच बयानबाजी को लेकर राजनीतिक पारा काफी बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की आलोचना किए जाने के बाद से भाजपा नेता राहुल गांधी पर पूरी तरह भड़क उठे हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन पर अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को ‘जोकरों का समूह’ करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर तंज कसते हुए यह दावा किया था कि उनकी विदेश नीति केवल विदेशी नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है। राहुल गांधी के इस बयान के सामने आने के बाद से ही सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।
इस मामले में पलटवार करते हुए झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का एक पुराना वीडियो और तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने उस दौर का एक संस्मरण साझा किया जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप में क्यूबा की यात्रा पर गई थीं और वहां के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो ने उन्हें गले लगाया था। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो को शेयर करते हुए राहुल गांधी से सीधा सवाल किया कि वह बताएं इस तरह नेताओं के गले मिलने को क्या कहा जाता है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के बयान ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण और संवैधानिक पद की गरिमा को बहुत ठेس पहुंचाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि राहुल गांधी को राजनीति में परिपक्व होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व चाहिए होता है, न कि इस तरह के अपरिपक्व नाटक। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार और देश के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की शब्दावली का उपयोग करना बेहद निंदनीय है और इससे देश की जनता का भी अपमान हुआ है।
इसके साथ ही भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी राहुल गांधी के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा संसदीय मर्यादाओं के पूरी तरह विपरीत है। भाजपा का यह स्पष्ट मानना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन देश के शीर्ष पदों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को गिराना उचित नहीं है। इस तीखी बयानबाजी के चलते देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है और दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।