कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से देश को 2000 करोड़ का नुकसान: HC पहुंचा वकील, मांगा 50 करोड़ मुआवजा|
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में मामले विचाराधीन होने का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता की 50 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग पर सुनवाई से मना कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट की इमारत और मामले से जुड़े लोग विरोध-प्रदर्शन और याचिका के संदर्भ में।
हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के कारण दिल्ली की सड़कें काफी अस्त-व्यस्त नजर आई थीं। कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर जैसी हाईप्रोफाइल जगहों पर इन प्रदर्शनों के चलते कारोबार और बिजनेस ठप नजर आए थे। ऐसा बताया गया कि सीजेपी के इस आंदोलन के कारण देश को लगभग 2000 करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसी पूरे मामले को लेकर एक याचिकाकर्ता वकील राकेश कुमार सैनी दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने अपनी याचिका में मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी से 50 करोड़ रुपये के अंतरिम मुआवजे की मांग कर दी।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों की वजह से आम जनता को भारी परेशानी और अससुविधा का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही आम लोगों और व्यापारियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी को मुआवजे के तौर पर 50 करोड़ रुपये अदा करने चाहिए। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसी तरह के अन्य मामले पहले से ही देश के सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, जो विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी कई अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपनी बात को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।
हाईकोर्ट की पीठ ने आगे यह भी कहा कि न्यायिक अनुशासन इस बात की मांग करता है कि ऐसी परिस्थितियों में यह अदालत इस मामले की कार्यवाही से पूरी तरह दूर रहे और कोई भी ऐसा आदेश पारित न करे जो सर्वोच्च न्यायालय के चल रहे आदेशों के विरोधाभासी हो। वहीं दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने अपनी दलील देते हुए कहा कि इस जनहित याचिका में जो राहत मांगी गई है, वह सर्वोच्च न्यायालय में लंबित अन्य मामलों से थोड़ी अलग है।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर सवाल उठाते हुए निशाना साधा और पूछा कि क्या यह प्रदर्शन किसी तय विरोध स्थल पर हो रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि त्योहारों के इस समय में व्यापार पर जो बुरा असर पड़ेगा, उसका जिम्मेदार कौन होगा। इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी की जमकर खिंचाई की। किसी यूजर ने सवाल किया कि भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 163 कहाँ चली गई और किसी को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया, तो किसी ने यह भी पूछा कि क्या इस विरोध प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। इसके अलावा एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने सवाल करते हुए लिखा कि ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस के जवान आखिरकार कहाँ चले गए थे। इस तरह यह पूरा मामला राजधानी दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों, मुआवजे की मांग और राजनीतिक बयानों के चलते लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है।