जामिया मिलिया इस्लामिया में बिगड़े हालात: 12 लोग हिरासत में, 5 छात्र अनशन पर बैठे, कैंपस के पास धारा 163 लागू |
धारा-163 जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है, जहां भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर के बाहर छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए छात्र नजर आ रहे हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासनों के बाद भी छात्र अपनी मांग पर डटे हुए हैं और आंदोलन जारी रखे हुए हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। वहीं दूसरी ओर, मांग को लेकर अनशन और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की संख्या अब बढ़कर 5 तक पहुंच चुकी है।
यूनिवर्सिटी में छात्र 12 अक्टूबर से ही छात्रसंघ चुनाव की निश्चित तारीख की घोषणा करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि जामिया में साल 2006 से ही छात्रसंघ भंग पड़ा हुआ है। मामले को शांत करने के उद्देश्य से 26 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया था कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही आंदोलन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने और सुरक्षा कर्मियों की भूमिका की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद छात्र इन आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और लगातार अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में एबिन ब्रेसिल का अनशन मंगलवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया, जबकि मोहम्मद रेहान खान का अनशन 13वें दिन भी जारी रहा। बाद में रितिक, अल्ताफ और अबूज़र के भी भूख हड़ताल में शामिल होने के बाद अनशनकारी छात्रों की संख्या 5 हो गई है। छात्रों द्वारा ओखला से कुलपति कार्यालय तक एक विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी, जिसकी सूचना के बाद प्रशासन ने कुलपति आवास के आसपास सुरक्षा बल बढ़ा दिए। हालांकि, कुछ छात्रों ने इस प्रस्तावित मार्च के पोस्टरों को फर्जी बताया और यह मार्च अंततः नहीं निकाला जा सका।
कैंपस में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय कुमार स्वयं मौके पर पहुंचे। पुलिस ने एहतियातन इलाके में धारा 163 लागू कर प्रदर्शन कर रहे करीब 12 लोगों को हिरासत में भी ले लिया है। इस बीच, सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी विनीत कुमार ने पूरी तरह से गलत और निराधार बताया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि जामिया के किसी गेट या परिसर के हिस्से को पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
द्वारका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जामिया की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि कैंपस में वर्ष 2006 से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं और वर्तमान में प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत का दौर जारी है। शिक्षा मंत्री ने अपील की कि कोई भी व्यक्ति कैंपस के भीतर कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास न करे, क्योंकि सरकार और प्रशासन छात्रों के इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।
दूसरी ओर, जामिया के शिक्षकों ने आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी व्यक्तियों की बढ़ती गतिविधियों पर गहरी नाराजगी प्रकट की है। शिक्षकों का आरोप है कि कुछ राजनीतिक तत्व जानबूझकर प्रदर्शन को भड़काकर विश्वविद्यालय में संकट का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस स्थिति पर मंथन करने के लिए डीन, एचओडी, सेंटर डायरेक्टर्स और वरिष्ठ अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें कैंपस के मौजूदा हालात और पठन-पाठन की व्यवस्था पर चर्चा हुई।
शिक्षकों की इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू की एक पोस्ट पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसमें उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए छात्रों के अधिकार का समर्थन किया था और यूनिवर्सिटी प्रशासन की आलोचना की थी। इसके अलावा शिक्षकों ने उल्लेख किया कि राजनीतिक दलों के नेता और सांसद बिना पूर्व सूचना के कैंपस में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी 21 अक्टूबर को गेट का ताला तोड़कर अंदर आए थे, जबकि इमरान मसूद 23 अक्टूबर को सीढ़ी की मदद से बाउंड्री पार कर परिसर में घुसे थे। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी को भी हिरासत में लिया गया था।
शिक्षकों का कहना है कि 24 अक्टूबर से बाहरी तत्वों ने पॉलिटिकल साइंस और इकनॉमिक्स डिपार्टमेंट की इमारत पर ताला लगा दिया है। इस वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन को दिवाली की छुट्टियों तक सभी कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से चलाने का फैसला लेना पड़ा है। छुट्टियों के बाद हालात की समीक्षा करके ही आगे का फैसला लिया जाएगा। शिक्षकों ने बाहरी लोगों से विश्वविद्यालय के आंतरिक मामलों से दूर रहने की अपील की है।
जामिया के इस घटनाक्रम का असर दिल्ली के अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर भी देखने को मिल रहा है। क्रांतिकारी युवा संगठन ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में 'ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे' का आयोजन किया। संगठन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में रैली निकालकर जामिया, आंबेडकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी बॉम्बे और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों की मांगों का समर्थन किया और विश्वविद्यालय प्रशासनों पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।