बांग्लादेश: चीनी टैंक में पाकिस्तानी गोला फटने से बड़ा धमाका, दो सैनिकों की मौत के बाद सेना में दहशत|
चटगांव में सैन्य अभ्यास के दौरान टाइप 59G टैंक में विस्फोट होने से दो सैनिकों की मौत हो गई। जांच में पाकिस्तानी गोला-बारूद की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
बांग्लादेश में 9 सितंबर को एक सैन्य अभ्यास के दौरान टैंक में हुए धमाके की असली वजह का पता चल गया है। बांग्लादेशी सेना के एक भरोसेमंद सैन्य सूत्र ने इस टैंक हादसे के पीछे पाकिस्तान के घटिया क्वालिटी के गोला-बारूद को जिम्मेदार बताया है। इस हादसे में शामिल टैंक भी चीनी है, यानी बांग्लादेश चीनी टैंक के अंदर पाकिस्तानी गोले का इस्तेमाल कर रहा था।
यह भीषण धमाका तब हुआ, जब इसके लगभग आठ महीने पहले 12 और 13 जनवरी को चीनी टेक्नीशियनों की दो टीमें बांग्लादेश सेना के सबसे पुराने मैकेनाइज्ड वाहनों में से एक T-59 टैंकों की मरम्मत और अपग्रेड का काम करके वापस गई थीं। 9 सितंबर को चटगांव की हाथाजारी फायरिंग रेंज में लाइव-फायर ट्रेनिंग के दौरान बांग्लादेश सेना के टाइप 59G 'दुर्जोय' मेन बैटल टैंक (MBT) में एक बड़ा धमाका हुआ।
इस दर्दनाक घटना में दो सैनिक अबू बकर सिद्दीक और तस्नीम रफायत की मौत हो गई, जबकि कैप्टन मिर्जा गंभीर रूप से घायल हो गए। नॉर्थ ईस्ट न्यूज ने बांग्लादेशी सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया है कि 5 अगस्त 2024 को हुए राजनीतिक बदलाव के बाद आर्म्ड फोर्सेज डिवीजन के तत्कालीन प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कामरुल हसन ने पाकिस्तान से गोला-बारूद खरीदने की पहल की थी। इसके बाद पाकिस्तान सेना और उसके रक्षा-औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ नियमित संबंध स्थापित किए गए।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान बांग्लादेश ने पाकिस्तान से बिना सही जांच और स्टैंडर्ड्स को फॉलो किए 40,000 राउंड गोला-बारूद, 2,000 टैंक राउंड, 40 टन RDX और 2,900 हाई-पावर वाले प्रोजेक्टाइल खरीदे थे। इनमें से कुछ गोला-बारूद का इस्तेमाल बाद में बांग्लादेश सेना की फायरिंग रेंज में ट्रेनिंग एक्सरसाइज के दौरान किया गया। हाथाजारी फायरिंग रेंज से मिली शुरुआती जानकारी से साफ पता चलता है कि जिस अभ्यास के दौरान यह जानलेवा धमाका हुआ, उसमें पाकिस्तानी गोला-बारूद का ही इस्तेमाल किया जा रहा था।
बांग्लादेश सेना के एक सूत्र के मुताबिक, शुरुआती तकनीकी जांच में यह देखा जा रहा है कि टैंक की गन बैरल के अंदर कोई रुकावट कैसे पैदा हुई और क्या इसी वजह से पीछे की तरफ धमाका हुआ। एक संभावना जिस पर खासतौर से गौर किया जा रहा है, वह यह है कि बैरल के अंदर कार्बन जमा होने या किसी बाहरी चीज के टुकड़े फंसने से प्रोजेक्टाइल और प्रोपेलेंट गैसों का सामान्य रूप से बाहर निकलना रुक गया हो।
ऐसी रुकावट से बैरल के अंदर असामान्य रूप से दबाव बढ़ सकता है, जिससे बैरल या चैंबर के बुरी तरह खराब होने और अंदरूनी धमाका होने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए, जांचकर्ता कई महत्वपूर्ण संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं, जिनमें गोला-बारूद से जुड़ी गंभीर कमियां भी शामिल हैं। वे इस हादसे को सिर्फ चीनी-निर्मित Type 59G की मैकेनिकल खराबी मात्र नहीं मान रहे हैं, बल्कि पाकिस्तानी हथियारों और बारूद की घटिया गुणवत्ता को मुख्य वजह मानकर सैनिकों में भी इसको लेकर अब गहरा डर बैठ गया है।