भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (बाईं ओर मेज के पास बैठे) और यूएफसी फाइटर पूजा तोमर (दाईं ओर बैठी हुई) कार्यालय में बैठक के दौरान बात करते हुए।

खेल की दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली और अपनी कड़ी मेहनत से इतिहास रचने वाली यूएफसी फाइटर पूजा तोमर इन दिनों अपनी ऐतिहासिक सफलताओं के कारण सुर्खियों में बनी हुई हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में पूजा तोमर से मुलाकात की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी जमकर तारीफ करते हुए उनकी उपलब्धियों को एक प्रेरणादायक सफर बताया है। सर्जियो गोर ने अपनी इस पोस्ट में यूएफसी के प्रेसिडेंट डाना व्हाइट को भी टैग किया और लिखा कि पूजा का यह शानदार सफर इस बात का सबसे बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे खेल सीमाओं से परे जाकर लोगों को आपस में जोड़ते हैं और देश की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से ताल्लुक रखने वाली पूजा तोमर का यह सफर संघर्षों और अटूट हौसलों की एक अनूठी मिसाल रहा है। उनका मूल परिवार बागपत का रहने वाला है, लेकिन करीब इंकानवे वर्ष पहले उनका परिवार मुजफ्फरनगर आकर बस गया था। बेहद कम उम्र में ही पूजा ने अपने पिता को खो दिया था, जिसके बाद उनके परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया और उनका हौसला बनाए रखा। उनकी दो बड़ी बहनें हैं, जो पेशे से डॉक्टर और नर्स हैं। परिवार के सहयोग और अपने मजबूत इरादों के दम पर पूजा ने बेहद कम उम्र में ही मार्शल आर्ट्स की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने वुशु, कराटे और ताइक्वांडो जैसे कड़े खेलों में हिस्सा लिया और वह पांच बार की राष्ट्रीय वुशु चैंपियन भी रह चुकी हैं। यूएफसी के इस बड़े मंच तक पहुंचने से पहले वह मैट्रिक्स फाइट नाइट और वन चैंपियनशिप जैसे अन्य प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में भी अपने हुनर का जलवा बिखेर चुकी हैं। वर्तमान समय में वह इंडोनेशिया के बाली में स्थित सोमा फाइट क्लब में रहकर अपनी ट्रेनिंग पूरी करती हैं।

पूजा तोमर ने 8 जून 2024 को अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप में अपना ऐतिहासिक डेब्यू किया था। अमेरिका के लुइसविल में आयोजित इस मुकाबले में उनका सामना ब्राजील की मजबूत फाइटर रेयान डॉस सैंटोस से हुआ था। यह रोमांचक मुकाबला कुल तीन राउंड तक चला था, जिसके बाद स्प्लिट डिसीजन के आधार पर पूजा तोमर को विजेता घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक मुकाबले में उतरने के साथ ही पूजा इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं और जब उन्होंने यह मुकाबला अपने नाम किया, तो वह यूएफसी में कोई भी बाउट जीतने वाली देश की पहली फाइटर बन गईं। उनकी इस अद्भुत उपलब्धि पर न सिर्फ उनके गृह जिले बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राजदूत द्वारा उनकी सराहना किया जाना यह साबित करता है कि पूजा का यह संघर्ष और उनका खेल अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका है और आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है।