बुरुंडी के विदेश मंत्री डॉ. एडवर्ड बिजिमाना भारत की यात्रा के दौरान नई दिल्ली में एक ब्रिक्स कार्यक्रम में शामिल होते हुए।

भारत के मित्र देश बुरुंडी के विदेश मंत्री डॉ. एडवर्ड बिजिमाना ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से अफ्रीका का यह छोटा सा देश भले ही आर्थिक रूप से संघर्षरत हो, लेकिन वैश्विक मंच पर इसकी कूटनीतिक स्थिति बेहद अहम है। वर्तमान में बुरुंडी के राष्ट्रपति अफ्रीकी यूनियन के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं, जिसके कारण इस राष्ट्र का कूटनीतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

भारत और बुरुंडी के द्विपक्षीय संबंध हमेशा से प्रगाढ़ और दोस्ताना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का बुरुंडी ने हर मंच पर पुरजोर समर्थन किया है। इसके अलावा, आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशों का रुख एक समान रहा है और बुरुंडी ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ भारत का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है। भारत ने भी विकास कार्यों में बुरुंडी को भरपूर सहयोग दिया है। भारत द्वारा दी गई लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत वहां पानी से बिजली बनाने वाले 20 मेगावाट के प्रोजेक्ट के लिए 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज मुहैया कराया गया था, जिससे वहां की ऊर्जा समस्याओं के समाधान में काफी मदद मिली है।

हालांकि बुरुंडी एक आर्थिक रूप से गरीब देश है और वहां के नागरिकों के सामने बुनियादी खाद्य सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं, जिसके चलते ब्रिक्स जैसी उभरती हुई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह में उसे पूर्ण और स्थायी सदस्यता मिलना संभव नहीं है। यही मुख्य कारण है कि भारत वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जैसे बदहाल देशों को इस समूह में शामिल किए जाने का कड़ा विरोध करता है, क्योंकि ब्रिक्स मुख्य तौर पर मजबूत होती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके बावजूद, अफ्रीकी यूनियन के नेतृत्व के नाते बुरुंडी की उपस्थिति कूटनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत की मेजबानी में हो रहे इस प्रतिष्ठित आयोजन में बुरुंडी के विदेश मंत्री की मौजूदगी वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच आपसी सहयोग और कूटनीतिक साझेदारियों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है।