साइना नेहवाल ने DPS आबूरोड के खेल महोत्सव में विजेता विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान की।

ओलंपिक पदक विजेता और विश्व की पूर्व नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की गरिमामयी उपस्थिति ने दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) आबूरोड के वार्षिक खेल महोत्सव को यादगार बना दिया। गुरुवार को आयोजित इस समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन, नियमित अभ्यास और पौष्टिक भोजन को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर उनके पिता डॉ. हरवीर सिंह नेहवाल भी मौजूद रहे।

सिरोही। दिल्ली पब्लिक स्कूल आबूरोड का वार्षिक खेल महोत्सव गुरुवार को खेल भावना, उत्साह और उमंग के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं साइना नेहवाल की उपस्थिति विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रही। विद्यालय के संस्थापक प्रवीण सिंह सोढ़ा, प्रधानाचार्य राजन सेठी, मेंटर ब्रदर नोएल, प्रमोद शर्मा और संस्था के सदस्य धनपत सिंह सोढ़ा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

महोत्सव की शुरुआत विद्यार्थियों के भव्य मार्च पास्ट से हुई। अनुशासित कदमताल और सुसंगठित पंक्तियों में मैदान में उतरे विद्यार्थियों ने मुख्य अतिथि साइना नेहवाल को सम्मानपूर्वक सलामी दी। इसके बाद विभिन्न आयु वर्गों की दौड़ प्रतियोगिताओं, आकर्षक ड्रिल प्रस्तुतियों और अन्य खेल गतिविधियों का आयोजन हुआ। विद्यार्थियों ने अपनी खेल प्रतिभा, आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया।


खेल मैदान में प्रतिभागियों का उत्साह, जीतने का संकल्प और प्रतिस्पर्धा के दौरान दिखाई दिया जोश पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रतियोगिताओं में खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का संदेश भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साइना नेहवाल ने जीवन में खेलों की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ खेल, शारीरिक स्वास्थ्य, अनुशासन और परिश्रम भी सफलता के लिए बेहद जरूरी हैं। खेलों से बच्चों में आत्मविश्वास, धैर्य, नेतृत्व क्षमता और चुनौतियों का सामना करने का साहस विकसित होता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास करने, समय का सम्मान करने और कठिन परिश्रम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। साथ ही घर का बना पौष्टिक भोजन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सफलता का कोई आसान रास्ता नहीं होता। निरंतर अभ्यास, आत्मअनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर ही असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

साइना नेहवाल ने खेल और शिक्षा को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय सफल, स्वस्थ और संतुलित व्यक्तित्व के दो आवश्यक स्तंभ बताया। उनका यह संदेश विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

विद्यालय के संस्थापक प्रवीण सिंह सोढ़ा की दूरदर्शी सोच के अनुरूप वार्षिक खेल महोत्सव में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी गई। विद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित रखने के बजाय ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां विद्यार्थी पढ़ाई के साथ खेल, अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास और नेतृत्व के गुण भी विकसित कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों के लिए भी यह संदेश सामने आया कि बच्चों की सफलता का आकलन केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। खेल मैदान में दिखाया गया साहस, टीम के प्रति समर्पण, हार को स्वीकार करने की क्षमता और दोबारा प्रयास करने का संकल्प भी उनके व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त खिलाड़ी साइना नेहवाल की मौजूदगी ने छोटे शहरों के विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन से यह संदेश मिला कि प्रतिभा, मेहनत, अवसर और सही मार्गदर्शन के दम पर छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

दिल्ली पब्लिक स्कूल आबूरोड का वार्षिक खेल महोत्सव केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, क्षमताओं, अनुशासन और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा आयोजन बना। साइना नेहवाल के प्रेरक संदेश और उनकी उपस्थिति ने इस महोत्सव को विद्यालय के इतिहास का यादगार अवसर बना दिया।

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