आबू रोड स्थित शांतिवन के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय में ब्रह्माकुमारीज के नवदशकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित ग्लोबल समिट 2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर उपस्थित अतिथिगण और गणमान्य व्यक्ति।

ब्रह्माकुमारीज के नवदशकोत्सव के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन, आबू रोड में आयोजित ग्लोबल समिट 2026 में सकारात्मक सोच, आंतरिक शक्ति, विश्व शांति, पवित्रता और मानवता के कल्याण पर मंथन हुआ। सम्मेलन में ब्रह्माकुमारीज की अंतरराष्ट्रीय वक्ता बीके शिवानी दीदी, संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका बीके मुन्नी दीदी, मुख्य प्रशासिका बीके मोहिनी दीदी, प्रसिद्ध गायिका पद्मश्री अनुराधा पौंडवाल, जी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सीईओ रक्तिम दास और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच सकारात्मक परिवर्तन, श्रेष्ठ संकल्पों और विश्व बंधुत्व की भावना को आवश्यक बताया।

बीके शिवानी दीदी ने कहा कि श्रेष्ठ संकल्पों के माध्यम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने सकारात्मक सोच से जीवन में श्रेष्ठ परिवर्तन लाने का संदेश देते हुए कहा कि हमारी सोच, स्वभाव, निर्णय और संस्कार जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। इसलिए स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। दूसरों की नकारात्मक बातों को बार-बार दोहराने के बजाय उनके प्रति शुभभावना रखनी चाहिए और श्रेष्ठ संकल्प करने चाहिए। इससे मन शांत, स्थिर और शक्तिशाली बनता है।

उन्होंने सभी को समानता की दृष्टि से देखने, रिश्तों में विश्वास बनाए रखने, सबको क्षमा करने और हर परिस्थिति में खुश रहने की प्रेरणा दी। बीके शिवानी दीदी ने श्रेष्ठ संस्कारों और कर्मों के माध्यम से स्वयं में परिवर्तन लाकर स्वर्णिम भारत के निर्माण तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, श्रेष्ठ कर्म और परमात्मा की शक्तियों के सहारे कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

ब्रह्माकुमारीज संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका बीके मुन्नी दीदी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि सभी लोग नवदशकोत्सव और ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचे हैं। विश्वभर की विशेष आत्माओं का यहां आगमन हुआ है। उन्होंने कहा कि आज यह संस्था कहां से कहां पहुंच गई है, इसे लोग केवल सुन रहे हैं, जबकि उन्होंने इस यात्रा को स्वयं देखा है। इसमें परमपिता परमात्मा का हाथ तो है ही, लेकिन दादियों के योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता, जिन्होंने अथक प्रयासों से संस्थान को आगे बढ़ाया। उनका त्याग, तपस्या और सेवा बेमिसाल है।

बीके मुन्नी दीदी ने कहा कि दादियां आज भी अप्रत्यक्ष रूप से शांतिवन में मौजूद हैं। उनकी शक्तियां मिलती रहती हैं और संस्थान आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने बताया कि वह 13 वर्ष की आयु में ज्ञान में आई थीं और 58 वर्षों से यहीं रह रही हैं। वह दादी प्रकाशमणि जी के दिखाए मार्ग पर चल रही हैं और प्यारे बाबा की हर बात का अनुसरण करती हैं। उन्होंने समारोह में शामिल लोगों से वापस लौटने के बाद नजदीकी सेवाकेंद्र पर जरूर जाने का आग्रह किया। उनके संबोधन का अंतिम हिस्सा उपलब्ध विवरण में अधूरा है।

ब्रह्माकुमारीज की मुख्य प्रशासिका बीके मोहिनी दीदी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि जो कन्याएं घर से निकलना नहीं चाहती थीं, उन्हें बाबा ने देश-विदेश भेजा। इसके पीछे केवल आध्यात्मिकता ही नहीं, बल्कि विश्व कल्याण की भावना भी है। उन्होंने कहा कि बाबा ने सबसे बड़ी बात उन्हें स्वमान दिया। संस्थान लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है और विश्व बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देता है।

बीके मोहिनी दीदी ने कहा कि विश्व के लोगों के मन में भारत के प्रति अद्भुत भावना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने विश्व को भारतवर्ष और सनातन संस्कृति के बारे में बताने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यहां पवित्रता के कारण सुख, शांति और स्नेह की अनुभूति होती है। पांच विकारों का त्याग करना जरूरी है, क्योंकि पवित्रता के बिना शांति संभव नहीं है। उन्होंने मन के भीतर चलने वाले संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बिना किसी कारण के अपने संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है। उनके संबोधन का आगे का हिस्सा भी उपलब्ध विवरण में अधूरा है।

प्रसिद्ध गायिका पद्मश्री अनुराधा पौंडवाल ने कहा कि यहां आने का अवसर मिलना उनका परम सौभाग्य है। उन्होंने बीके शिवानी दीदी को विश्वविख्यात बताते हुए कहा कि वह ब्रह्माकुमारी बहनों से मिलती रही हैं।

जी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सीईओ रक्तिम दास ने कहा कि वह पहली बार यहां आए हैं और ब्रह्माकुमारीज की नब्बे वर्षों की यात्रा अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया केवल हथियारों के युद्ध ही नहीं, बल्कि आर्थिक युद्ध भी देख रही है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों के भीतर क्रोध, तनाव और एंग्जाइटी बढ़ रही है। इसलिए मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक हो गई है।

रक्तिम दास ने कहा कि मीडिया को आशावाद बढ़ाना होगा और ऐसी खबरें प्रस्तुत करनी होंगी, जो लोगों में आशा का संचार करें। उन्होंने ग्लोबल समिट की थीम को मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। भारत की कहानी कहने की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए कि किसी वेब सीरीज में नायक बदला लेने के बजाय क्षमा कर देता है और इसी वजह से नायक कहलाता है। ऐसे उदाहरण गढ़ने की जरूरत है। उन्होंने तकनीक के संदर्भ में कहा कि हमें उसका गुलाम नहीं बनना है, बल्कि उसका मालिक बनना है। बदलाव व्यक्तिगत स्तर पर होता है।

सम्मेलन में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी संबोधित किया। उन्होंने ग्लोबल समिट के विषय को अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि विश्व इस समय सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। कई देशों के बीच युद्ध चल रहा है या युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। मौजूदा विषम परिस्थितियों में पूरी दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। अविश्वास बढ़ा है और हिंसा के साथ पर्यावरण संकट भी गंभीर चुनौती बना हुआ है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने मौजूदा दौर को भू-राजनीतिक उथल-पुथल का समय बताते हुए कहा कि विश्व का नवीनीकरण केवल व्यवस्थाओं में बदलाव से नहीं हो सकता। इसके लिए मनुष्य की सोच, प्राथमिकताओं और कार्य करने की पद्धति में परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने इस दिशा में ब्रह्माकुमारीज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और संस्थान की नब्बे वर्षों की यात्रा में विश्व कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करने वाले ब्रह्माकुमार भाइयों और बहनों को प्रणाम किया।

ग्लोबल समिट के मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रतीक्षा डांस ग्रुप की मनमोहक प्रस्तुति हुई और कत्थक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। शांतिवन में आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन के मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अतिथि मुग्ध हुए। इस दौरान डीडी न्यूज के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी मंच पर पहुंचे। नोएडा फिल्म सिटी और मारवाह स्टूडियो के संस्थापक संदीप मारवाह भी पहुंचे, जबकि वरिष्ठ पत्रकार अमन चोपड़ा भी मंच पर मौजूद रहे।

ग्लोबल समिट 2026 में आध्यात्मिक चिंतन, मीडिया की जिम्मेदारी, तकनीक के उपयोग, सकारात्मक सोच और वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर दिए गए संदेशों ने व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व कल्याण के महत्व को रेखांकित किया। वक्ताओं ने श्रेष्ठ संकल्पों, पवित्रता, क्षमा, आशावाद और विश्व बंधुत्व को शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक बताया।

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