त्रिनेत्र गणेश मेले में लंपी का खतरा, गौवंश के आवागमन पर एक माह रोक की अपील
त्रिनेत्र गणेश मेले में लंपी को लेकर पशुपालन विभाग ने जागरूकता शिविर लगाए, सवाई माधोपुर में गौवंश आवागमन पर एक माह रोक की अपील।
तस्वीर में महिलाएं खुले रास्ते पर पम्फलेट बांटती हुई नजर आ रही हैं।
रणथम्भौर दुर्ग स्थित श्री त्रिनेत्र गणेश लक्खी मेला-2026 में लंपी स्किन डिजीज के संक्रमण को लेकर पशुपालन विभाग ने जागरूकता अभियान तेज किया है। जिला कलेक्टर काना राम के निर्देशानुसार मेले में आने वाले पशुपालकों एवं ग्रामीणों को बीमारी से बचाव और रोकथाम की जानकारी देने के लिए विभिन्न स्थानों पर जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं।
शिविरों में पशुपालकों को लंपी स्किन डिजीज के लक्षण, बचाव के उपाय, पशुओं की देखभाल और समय पर पशु चिकित्सकीय सहायता लेने के संबंध में जानकारी दी जा रही है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने बताया कि राज्य के भरतपुर, डीग, अलवर एवं करौली जिलों में लंपी स्किन डिजीज के मामले सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि सवाई माधोपुर जिले में भी एक निराश्रित गौवंश में संक्रमण का मामला सामने आया है, जिसे राज्य सरकार द्वारा लंपी स्किन डिजीज से ग्रसित घोषित किया गया है। स्थिति को देखते हुए अगले एक माह तक गौवंश के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध रखने की अपील की गई है।
डॉ. राजीव गर्ग के अनुसार लंपी स्किन डिजीज मुख्यतः गौवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, त्वचा पर कठोर गांठें, भूख में कमी एवं दूध उत्पादन में गिरावट शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों से तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा जिला नियंत्रण कक्ष प्रभारी डॉ राजेश रोशन के मोबाइल नंबर 9636980734 पर सूचना देने की अपील की गई है। संक्रमित अथवा संदिग्ध पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने को भी कहा गया है।
पशुपालकों से पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखने तथा मच्छर, मक्खी एवं किलनी जैसे रक्त चूसने वाले कीटों से बचाव के उपाय करने का आग्रह किया गया है। बीमार पशु को गुणवत्तापूर्ण आहार और समय पर पशु चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने की भी अपील की गई है। डॉ. गर्ग ने कहा कि समय पर उपचार एवं उचित देखभाल से संक्रमित पशु के शीघ्र स्वस्थ होने में मदद मिलती है।
पशुपालन विभाग जिले की गौशालाओं के प्रबंधकों से समन्वय कर आइसोलेशन केन्द्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी कर रहा है। इन केन्द्रों में लंपी से संक्रमित गौवंश को उपचार एवं निगरानी के लिए अलग रखा जा सकेगा। पशुपालकों से प्रभावित या संदिग्ध पशुओं को अन्य पशुओं के साथ चराने अथवा रखने से बचने की अपील की गई है।
मेले में लगाए गए जागरूकता शिविरों के माध्यम से पशुपालकों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ संक्रमण नियंत्रण, पशुशाला की स्वच्छता और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। लंपी संक्रमण की स्थिति को देखते हुए विभाग की ओर से जागरूकता और अलगाव व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।