तस्वीर में राजस्थान पुलिस का साइबर एडवाइजरी प्रतीक चिन्ह और हेल्पलाइन नंबर 1930 लिखा है।

त्योहारी सीजन में फ्लिपकार्ट की ‘बिग बिलियन डेज’ और अमेज़न की ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल’ सेल के दौरान भारी छूट, आकर्षक कैशबैक और सीमित समय के ऑफर के नाम पर साइबर ठग लोगों को निशाना बना सकते हैं। फर्जी वेबसाइटों, नकली मोबाइल ऐप और संदिग्ध भुगतान लिंक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी से आमजन को बचाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।

सवाई माधोपुर, 10 अक्टूबर। महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी इस एडवाइजरी में ऑनलाइन खरीदारी के दौरान सतर्कता बरतने और भुगतान करने से पहले ऑफर की प्रामाणिकता जांचने की सलाह दी गई है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि फेस्टिवल सहित बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान साइबर अपराधी भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और आकर्षक कैशबैक का लालच देकर लोगों को ठगने का प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए “आज ही खरीदें”, “केवल 2 मिनट बाकी” और “अभी भुगतान करें, वरना ऑफर खत्म” जैसे संदेशों के जरिए लोगों पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बनाया जाता है। ठगी के इन तरीकों में फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, संदिग्ध लिंक और भुगतान से जुड़े हथकंडे शामिल हो सकते हैं।

राजस्थान पुलिस (R4C) ने स्पष्ट किया है कि थोड़ी-सी सावधानी और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम को कम किया जा सकता है। पुलिस ने सलाह दी है कि भारी छूट देखकर जल्दबाजी में भुगतान न करें और संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर स्वयं ऑफर की जांच करें। व्हाट्सऐप, एसएमएस, टेलीग्राम या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक के जरिए सीधे खरीदारी करने से बचें।

पुलिस ने वेबसाइट का डोमेन ध्यान से जांचने की भी सलाह दी है। वेबसाइट पर HTTPS या ताले का निशान होना उसके असली होने की गारंटी नहीं है। मोबाइल ऐप केवल आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर या एप्पल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें।

एडवाइजरी के अनुसार, यूपीआई पिन का इस्तेमाल पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान अधिकृत करने के लिए होता है। इसलिए रिफंड या कैशबैक के नाम पर यूपीआई पिन डालने अथवा क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहे जाने पर सतर्क रहें। इसी तरह, कस्टमर केयर नंबर के लिए गूगल सर्च या सोशल मीडिया पोस्ट पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। सहायता के लिए संबंधित कंपनी की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट में दिए गए विकल्पों का उपयोग करें।

राजस्थान पुलिस ने अनजान व्यक्तियों के कहने पर AnyDesk, TeamViewer या अन्य रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल नहीं करने की हिदायत दी है। स्क्रीन शेयर करके बैंकिंग या भुगतान संबंधी गतिविधियां करने से भी बचने को कहा गया है। ऑनलाइन खरीदारी के लिए कम लिमिट वाले कार्ड या अलग बैंक खाते का इस्तेमाल करने पर विचार करें। कार्ड की ऑनलाइन और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन सुविधा जरूरत के अनुसार ही चालू रखें।

बैंक खातों और कार्ड से जुड़े एसएमएस तथा ईमेल अलर्ट सक्रिय रखने के साथ ई-कॉमर्स, ईमेल और बैंकिंग खातों के लिए मजबूत एवं अलग-अलग पासवर्ड रखने की सलाह दी गई है। रिफंड के नाम पर कोई अनजान ऐप इंस्टॉल न करें और ऑर्डर तथा डिलीवरी की स्थिति संबंधित कंपनी की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर स्वयं जांचें। मॉल, कैफे, एयरपोर्ट सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों के वाई-फाई नेटवर्क पर बैंकिंग या अधिक राशि का भुगतान करने से भी बचें।

यदि गलती से पैसे ट्रांसफर हो जाएं या कोई संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक अथवा कार्ड जारीकर्ता से संपर्क करें। शिकायत के लिए लेन-देन की तारीख, राशि, यूटीआर या ट्रांजेक्शन आईडी, फोन नंबर, वेबसाइट का यूआरएल और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना जरूरी है।

साइबर ठगी की शिकायत के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क करने के साथ नजदीकी पुलिस स्टेशन अथवा साइबर पुलिस स्टेशन में भी सूचना दी जा सकती है।

त्योहारी सेल के दौरान ऑनलाइन खरीदारी में आकर्षक ऑफर के साथ धोखाधड़ी का जोखिम भी बना रहता है। राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी का उद्देश्य आमजन को सतर्क करना और आधिकारिक माध्यमों से खरीदारी तथा सुरक्षित भुगतान के प्रति जागरूक करना है।

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