राजस्थान में घटे गंभीर अपराध, महिला सुरक्षा और एनडीपीएस पर पुलिस सख्त
वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में हत्या और पोक्सो मामलों में आई गिरावट, जबकि एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई बढ़ने से बढ़े विशेष अधिनियमों के प्रकरण।
सवाई माधोपुर, 10 अक्टूबर। राजस्थान में वर्ष 2026 की तीन तिमाहियों के अपराध आंकड़ों में कुल दर्ज प्रकरणों और गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। सितंबर तक के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार हत्या, हत्या के प्रयास, संपत्ति संबंधी अपराधों और महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध कई गंभीर अपराधों में गिरावट आई है। वहीं, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय से लेकर फील्ड स्तर तक प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान पुलिस अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और आमजन, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्रवाई कर रही है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सितंबर तक भारतीय दंड संहिता (भादंसं)/भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कुल 1,47,534 प्रकरण दर्ज हुए थे। वर्ष 2026 में अब तक 1,45,781 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इस तरह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1,753 प्रकरण कम दर्ज हुए हैं। गंभीर अपराधों में भी गिरावट दर्ज की गई है। हत्या के मामलों में 23 और हत्या के प्रयास के मामलों में 174 प्रकरणों की कमी आई है।
संपत्ति संबंधी अपराधों के आंकड़ों में भी गिरावट सामने आई है। डकैती के मामलों में 19.67 प्रतिशत, लूट में 16.40 प्रतिशत और नकबजनी में 4.63 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इन अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस की ओर से लगातार निगरानी, प्रभावी गश्त और लक्षित कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर, स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में इन अधिनियमों के तहत 65,753 प्रकरण दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या बढ़कर 70,035 हो गई है। इस प्रकार 4,282 प्रकरणों की वृद्धि दर्ज की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि पुलिस की सक्रिय कार्रवाई और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले वर्ष की तुलना में 1,815 प्रकरण यानी 35.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आर्म्स एक्ट के मामलों में 538 प्रकरण यानी 10.17 प्रतिशत और आबकारी अधिनियम के तहत 908 प्रकरण यानी 4.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में इसके विपरीत कमी आई है। गत वर्ष की तुलना में इस श्रेणी में 954 प्रकरण कम दर्ज हुए हैं। कुल मिलाकर एससी/एसटी अधिनियम के मामलों में 15.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराधों के आंकड़ों में भी कमी सामने आई है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 478 प्रकरण यानी 19.20 प्रतिशत की गिरावट आई है। दुष्कर्म के मामलों में 356 प्रकरण यानी 7.96 प्रतिशत और छेड़छाड़ के मामलों में 603 प्रकरण यानी 7.38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। छेड़छाड़ जैसे अपराधों में कमी के पीछे कालिका यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिलाओं की सुरक्षा के लिए संचालित अन्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।
हालांकि, घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और अन्य महिला संबंधी पारिवारिक विवादों में दर्ज प्रकरणों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2025 में ऐसे 9,979 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 10,562 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। विभाग के अनुसार, राज्य में व्यापक जनजागरूकता के चलते महिलाएं इन मामलों में निर्भय होकर शिकायत दर्ज करा रही हैं।
घरेलू हिंसा और पारिवारिक समस्याओं के विरुद्ध महिलाओं का सामने आकर पुलिस तक पहुंचना न्याय व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई के प्रति उनके विश्वास का सकारात्मक संकेत माना गया है। महिलाओं को आवश्यक सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक वृत्त स्तर पर एक पुलिस थाने में महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र संचालित किया जा रहा है।
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को लेकर संवेदनशील हैं और उनकी रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध हैं। पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में महिला अपराधों पर नियंत्रण शामिल है। इसके तहत अपराधों की रोकथाम के साथ पीड़ितों को त्वरित सहायता, प्रभावी अनुसंधान और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2026 के सितंबर तक के आंकड़े कुल अपराधों और कई गंभीर श्रेणियों में गिरावट दर्शाते हैं, जबकि विशेष अधिनियमों तथा घरेलू और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में दर्ज प्रकरणों की बढ़ती संख्या भी सामने आई है।