राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बजरी खनन पर सरकार का बड़ा एक्शन, एआई निगरानी से सिंडिकेट पर होगी सख्त कार्रवाई
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बजरी खनन रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। एआई डैशबोर्ड, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी, थर्मल कैमरों से निगरानी, जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही सहित कई अहम फैसले लिए गए।
तस्वीर में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और अन्य अधिकारी जयपुर में एक बैठक के दौरान चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 31 जुलाई। उच्चतम न्यायालय के आदेशों और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों के अनुपालन में राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बजरी खनन की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण के लिए सुदृढ़, आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में इस संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार न्यायालय के सभी दिशा-निर्देशों का समयबद्ध और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित विभागों को अंतर-विभागीय समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध बालू खनन की रोकथाम, समन्वय और न्यायालय के निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए संबंधित जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। वहीं जिला पुलिस अधीक्षकों को अवैध खनन के नेटवर्क को ध्वस्त करने, वित्तीय पोषण करने वालों, परिवहनकर्ताओं और आपराधिक सिंडिकेट्स की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने संरक्षण उपायों को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से एआई-एनालिटिक्स आधारित इंटेलिजेंट ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए। शुष्क मौसम के दौरान उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे के माध्यम से नदी के स्वरूप में होने वाले बदलाव तथा नए खनन स्थलों की मासिक मैपिंग की जाएगी। इसके अलावा मुख्य मार्गों और पुलों पर सीसीटीवी, पीटीजेड तथा एआई-सक्षम थर्मल कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर समन्वय को मजबूत करने के लिए संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा संयुक्त एसओपी जारी की जाएगी। इसके तहत उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों, पुलिस और वन अधिकारियों की संयुक्त टीमें प्रत्येक 15 दिन में आकस्मिक निरीक्षण करेंगी। कार्रवाई की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इन अभियानों में बॉडी कैमरा और जीपीएस उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
जन-भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अभयारण्य क्षेत्र के प्रवेश द्वारों, चेक पोस्टों और ग्राम पंचायत कार्यालयों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए जाएंगे, जो संपर्क पोर्टल से जुड़े होंगे। इनके माध्यम से स्थानीय ग्रामीण, मछुआरे और आमजन गोपनीय रूप से जिओ-टैग फोटो और वीडियो के साथ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। सफल सूचना और धरपकड़ पर सूचनादाताओं के लिए पुरस्कार योजना भी लागू की जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि अवैध खनन रोकथाम में अधिकारियों के प्रदर्शन तथा न्यायालय के आदेशों के पालन की समीक्षा संबंधित जिला अधिकारियों की वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में शामिल की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में विफलता की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की जाएगी।
वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों और होमगार्ड्स की तैनाती की जाएगी। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत आवश्यक अधिसूचनाएं जारी करने तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की जाएगी और बार-बार अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले वाहनों की जब्ती की कार्रवाई होगी। स्थानीय समुदायों की अवैध गतिविधियों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से इको-टूरिज्म, कम्युनिटी गश्त और वैकल्पिक आजीविका योजनाओं का भी विस्तार किया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई व्यापक अनुपालन रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में वन विभाग सहित खनन, राजस्व, वित्त, खाद्य विभाग तथा जिला स्तरीय कार्य निगरानी दल के सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।