तस्वीर में बरनाला सोसायटी सदस्य एडवोकेट मंजू कुमारी मीना दिखाई दे रही हैं।

बौंली, बामनवास। खाद वितरण में कालाबाजारी रोकने के लिए लागू की गई ई-टोकन एवं ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था अब किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करना अच्छी पहल है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और खाद वितरण की मौजूदा व्यवस्था के कारण उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही है।

बरनाला सोसायटी सदस्य एडवोकेट मंजू कुमारी मीना ने कहा कि खाद वितरण की व्यवस्था किसान की जमीन के रकबे और फसल की वास्तविक जरूरत के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक बीघा जमीन वाले किसान और 50 बीघा जमीन वाले किसान को समान मात्रा में खाद देना कैसे उचित हो सकता है। बड़े किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।

बटाईदार किसानों के लिए भी हो सरल प्रावधान

मंजू कुमारी मीना ने कहा कि कई किसान ऐसे हैं जिनके नाम जमीन नहीं है, लेकिन वे बटाई पर खेती कर अपना परिवार चला रहे हैं। वर्तमान ऑनलाइन व्यवस्था में ऐसे किसानों के लिए पर्याप्त सरल प्रावधान नहीं होने से उन्हें खाद प्राप्त करने में परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि बटाईदार किसानों को भी सत्यापन के बाद आसानी से खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।

टोकन लेकर पहुंचे तो मशीन खराब, बाद में कैंसिल होने की शिकायत

उन्होंने बताया कि किसानों को ई-टोकन मिलने के बाद जब वे खाद लेने दुकान पर पहुंचते हैं तो कभी मशीन खराब होने, कभी नेटवर्क अथवा अन्य तकनीकी समस्या के कारण खाद नहीं मिल पाती। कई किसानों ने यह भी शिकायत की कि बाद में उनका टोकन कैंसिल हो गया। ऐसी स्थिति में किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।

टोकन वाले क्षेत्र के आसपास ही उपलब्ध हो पर्याप्त खाद

मंजू कुमारी मीना ने मांग की कि जिस क्षेत्र से किसान ई-टोकन प्राप्त करता है, उसके 2 से 10 किलोमीटर के दायरे में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए। इससे किसान को टोकन लेने के बाद खाद के लिए दूर-दराज की दुकानों और सोसायटियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

कालाबाजारी रोकना उद्देश्य है तो किसान को भी मिले राहत

मंजू कुमारी मीना ने कहा कि ई-टोकन व्यवस्था का उद्देश्य कालाबाजारी पर रोक लगाना और किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना है। इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें तकनीकी खामी, सर्वर या मशीन खराब होने की स्थिति में किसान को वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से खाद मिल सके।

उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा कर छोटे किसान, बड़े किसान और बटाईदार किसानों की वास्तविक जरूरत के अनुसार पारदर्शी, सरल और व्यावहारिक खाद वितरण व्यवस्था लागू करने की मांग की। किसानों की मांग है कि व्यवस्था में तकनीकी दिक्कतों और वितरण संबंधी समस्याओं का समाधान कर उन्हें समय पर खाद उपलब्ध कराया जाए।

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