अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: रणथम्भौर बना बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल, नई पीढ़ी को दिया प्रकृति बचाने का संदेश

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Update: 2026-07-29 15:02 GMT

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यशाला में जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों तथा विभागीय कार्मिकों-अधिकारियों को बाघ संरक्षण से जुड़ने का संदेश देते हुए कहा कि पृथ्वी पर मानव जीवन विभिन्न जैव प्रजातियों, वनस्पतियों और नदी-नालों के अस्तित्व के बिना संभव नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि आम लोगों और विशेषकर नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझने और इसके लिए सक्रिय रूप से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सवाई माधोपुर और रणथम्भौर के आसपास के लोगों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर दुनिया के सामने संरक्षण का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है।

रणथम्भौर बाघ परियोजना के मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह ने कहा कि वर्ष 1970 के दशक में जब पूरी दुनिया में बाघ के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था, तब सवाई माधोपुर के रणथम्भौर में बाघ संरक्षण परियोजना की शुरुआत की गई। भारत और राज्य सरकारों के विशेष प्रयासों तथा स्थानीय लोगों के सहयोग से यह परियोजना पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनी। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के लिए रणथम्भौर में किए गए प्रयोगों का ही परिणाम है कि धरती के लगभग हर उस क्षेत्र में, जहां कभी बाघ रहते थे, आज उनके संरक्षण के लिए प्रयास हो रहे हैं और बाघों का अस्तित्व बना हुआ है।

शारदा प्रताप सिंह ने कहा कि वन विभाग के कार्मिकों और स्थानीय लोगों की इस सामूहिक सफलता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वन विभाग ने स्थानीय बच्चों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया है। उन्होंने कहा कि जीवन का मूल आधार हवा, पानी और भोजन जंगलों से प्राप्त होता है तथा इन प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए बाघों का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि बाघों के अस्तित्व से ही जंगल संरक्षित और जीवंत बने रह सकते हैं।

जिला कलक्टर काना राम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाघों के कारण ही पूरी दुनिया में सवाई माधोपुर और रणथम्भौर की विशिष्ट पहचान बनी है। उन्होंने कहा कि इस पहचान को भविष्य में भी बनाए रखने में नई पीढ़ी की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति संरक्षण का संदेश घर-घर पहुंचाने का आह्वान किया।

जिला कलक्टर ने लोगों से अपील की कि वे बाघ, बघेरे सहित सभी वन्य जीवों का सम्मान करें और उन्हें अकारण परेशान नहीं करें। यदि जंगल या मानव आबादी क्षेत्र में किसी वन्य जीव का सामना हो तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने वन क्षेत्र और उसके आसपास प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग नहीं करने, स्वयं कचरा नहीं फैलाने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी प्रकृति संरक्षण के इन संदेशों के प्रभावी वाहक बन सकते हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी ने पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए प्रकृति संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए विद्यार्थियों से अपने जीवन के विशिष्ट अवसरों पर पौधे लगाने तथा उनका संरक्षण और पोषण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को बाघ से हर समय शांत और तनावमुक्त रहने तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरी ताकत से प्रयास करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

कार्यक्रम को उप मुख्य वन संरक्षक सामाजिक वानिकी सुनील कुमार तथा मानस सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वन विभाग के दो कार्मिकों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया, जबकि बाघ संरक्षण से जुड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल रहने वाले 15 विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने राजीव गांधी संग्रहालय परिसर में पौधारोपण भी किया। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम बाघ संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्रकृति के प्रति सामाजिक सहभागिता को सशक्त बनाने का संदेश देकर संपन्न हुआ।

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