चरक जयंती पर आयुर्वेद की उपयोगिता पर प्रकाश, 36 छात्राओं का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
चरक जयंती पर कुश्तला में आयुर्वेद की उपयोगिता बताई गई और 36 छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर मौसमी बीमारियों से बचाव की जानकारी दी गई।
तस्वीर में कुश्तला के महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय के एक कमरे में शिक्षक और चिकित्साधिकारी मंच पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि सामने बेंच पर बैठी छात्राएं कार्यक्रम में भाग ले रही हैं।
चरक जयंती के अवसर पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर आयुष राजकीय आयुर्वेद औषधालय कुश्तला की ओर से सोमवार को आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के तहत स्थानीय महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय कुश्तला में स्वास्थ्य प्रबोधन एवं छात्र स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को आयुर्वेद की उत्पत्ति, विकास, उपयोगिता तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता की जानकारी दी गई।
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विजय शंकर बैरवा ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक समग्र जीवनशैली है। उन्होंने बताया कि “आयुर्वेद” का अर्थ जीवन का ज्ञान है और इसका मुख्य उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी का उपचार करना है।
डॉ. बैरवा ने आयुर्वेद की परंपरा में आचार्य चरक, सुश्रुत और वाग्भट के योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि चरक संहिता में कायचिकित्सा, आहार, जीवनशैली और रोगों की रोकथाम पर विशेष बल दिया गया है। बदलती दिनचर्या में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग और ऋतुचर्या यानी मौसम के अनुसार खान-पान के महत्व को भी उन्होंने रेखांकित किया। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या काढ़े का सेवन हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कंपाउंडर दिनेश कुमार वर्मा के सहयोग से 36 छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन की जांच की गई। चिकित्साधिकारी डॉ. विजय शंकर बैरवा ने आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के 18 स्वास्थ्य सूचकांकों की जानकारी भी दी।
उन्होंने बदलते मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, पाचन संबंधी समस्याओं और मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के उपाय साझा किए। कार्यक्रम में उपप्रधानाचार्य मनुदेव सिंघल और सुरेश माली उपस्थित रहे।