सलूम्बर। नवगठित सलूम्बर जिले में पहली बार हो रहे जिला परिषद चुनाव की तस्वीर नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ हो गई है। सोमवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के साथ ही जिला परिषद के सभी 21 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 79 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद अब गांव-गांव और ढाणी-ढाणी में चुनाव प्रचार की सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

जिला परिषद के 21 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी ने सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के पांच प्रत्याशी और 11 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मुकाबले में हैं। ऐसे में कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला होगा, जबकि कुछ वार्डों में चार से छह प्रत्याशियों के बीच चुनावी संघर्ष देखने को मिलेगा।

जिला परिषद के 21 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नामांकन के अंतिम दिन तक कुल 102 नामांकन दाखिल हुए थे। सोमवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद जारी सूची में 79 प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, शेष 23 नामांकनों में कितने प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए और कितने नामांकन निरस्त हुए, इसकी अलग से पुष्टि होना बाकी है।

वार्ड संख्या 10 में सबसे अधिक छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। यहां कांग्रेस के देवेन्द्र सिंह, भाजपा के हितेश कुमार सेवक और भारत आदिवासी पार्टी के नरेश कुमार के अलावा तीन निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं वार्ड संख्या 2, 3, 11 और 13 में पांच-पांच प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। वार्ड संख्या 1, 4, 5, 9 और 18 में चार-चार प्रत्याशी मैदान में हैं। शेष 11 वार्डों में तीन-तीन प्रत्याशियों के बीच चुनावी मुकाबला होगा।

चुनाव चिह्न आवंटन के दौरान भाजपा प्रत्याशियों को कमल का फूल, कांग्रेस प्रत्याशियों को हाथ, भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवारों को हॉकी एवं गेंद और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को झाड़ू चुनाव चिह्न मिला है। निर्दलीय प्रत्याशियों को हाथ ठेला, गैस चूल्हा, वाद्य यंत्र, हाथ चक्की, कैंची, रेडियो और टेलीफोन जैसे चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।

चुनाव चिह्न मिलने के साथ ही प्रत्याशियों के लिए प्रचार का रास्ता खुल गया है। अब राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के समर्थन में जनसंपर्क, बैठकों और चुनावी सभाओं के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने में जुटेंगे। नवगठित सलूम्बर जिले की पहली जिला परिषद पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। वहीं आम आदमी पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी कई वार्डों में प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

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