विश्व आदिवासी दिवस पर सलूम्बर में भव्य रैली, पारंपरिक वेशभूषा में दिखी संस्कृति की झलक
सलूम्बर में विश्व आदिवासी दिवस पर हजारों समाजबंधुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भव्य रैली निकाली। ढोल की थाप, सामूहिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गवरी ने आयोजन को खास बना दिया।
तस्वीर में मंच के सामने पारंपरिक वेशभूषा और बॉडी पेंटिंग में बैठे बच्चे और खड़े कलाकार नजर आ रहे हैं।
सलूम्बर। रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सलूम्बर शहर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और एकजुटता के रंग में रंगा नजर आया। जिलेभर से हजारों की संख्या में समाजबंधु कार्यक्रम में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवा, महिलाएं और बच्चे रैली का हिस्सा बने और अपनी सांस्कृतिक पहचान की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की शुरुआत राणा पूंजा चैक से हुई। यहां से आदिवासी समाज की भव्य रैली रवाना हुई, जो डाल चैराहा, आशीर्वाद गार्डन होते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान पहुंची। रैली के दौरान शहर ढोल की थाप और पारंपरिक गीतों से गूंजता रहा। समाजबंधु पारंपरिक गीतों पर नृत्य करते हुए आगे बढ़े।
रैली में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। पारंपरिक पोशाक, आभूषण और सांस्कृतिक प्रतीकों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। ढोल की थाप पर सामूहिक नृत्य और गीतों ने आयोजन को सांस्कृतिक महोत्सव का रूप दे दिया। रैली में शामिल लोगों के पैरों में बंधे घुंघरुओं की झंकार और पारंपरिक नृत्य ने माहौल को और जीवंत बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता की झलक देखने को मिली।
खेल मैदान में पहुंचने के बाद विश्व आदिवासी दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आदिवासी गीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। राजस्थान की लोकप्रिय गवरी का नृत्य भी कार्यक्रम का आकर्षण रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, मातृशक्ति और समाजबंधुओं ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
आयोजन से जुड़े लोगों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति, परंपरा, अधिकारों और गौरवशाली पहचान को मजबूत करने का दिन है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ती है और समाज में एकजुटता का संदेश भी जाता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सलूम्बर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे समाजबंधुओं, मातृशक्ति, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।