तेरापंथ भवन चेम्बूर में मंत्रदीक्षा का भव्य आयोजन, 200 बच्चों ने लिया संस्कारों का संकल्प
चेम्बूर के तेरापंथ भवन में मंत्रदीक्षा कार्यक्रम में 200 बच्चों और 80 प्रशिक्षिकाओं ने भाग लिया, जहां नवकार मंत्र व अहिंसा का संदेश दिया गया।
तस्वीर में मंच पर जैन साध्वियां बैठी हैं, जिनमें एक साध्वी माइक से संबोधित कर रही हैं।
तेरापंथ भवन चेम्बूर में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ठाणा-६ के पावन सान्निध्य में मंत्रदीक्षा का भव्य आयोजन हुआ। तेरापंथ युवक परिषद चेम्बूर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमद् रायचंद, जीतमल एवं माणकगणी जोन की ग्यारह (11) ज्ञानशालाओं से करीब 200 बच्चे और 80 प्रशिक्षिकाएं उपस्थित हुईं।
मंत्रदीक्षा के उपक्रम को संपादित करते हुए विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने कहा, “जो स्मरण मात्र से हमारी रक्षा करता है, वह मंत्र है।” उन्होंने कहा कि जैन शासन का महामंत्र नवकार सर्वोच्च मंत्र है। यह मंत्र सर्व पापों का नाशक और सर्व मंगलों में सर्वोपरि है। उन्होंने बच्चों से नवकार मंत्र का स्मरण करने तथा अपने जीवन को सुसंस्कारों से सज्जित करने का आह्वान किया।
प्रबुद्ध साध्वीश्री डा. योगक्षेमप्रभाजी ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा कि आज के कार्यक्रम की मुख्य थीम अहिंसा है। ज्ञानशाला के बच्चों ने सुंदर प्रस्तुतियों के माध्यम से अहिंसा की महिमा बताई है। उन्होंने कहा कि अहिंसा से ही मानव जाति का कल्याण संभव है।
कार्यक्रम का शुभारंभ चेम्बूर ज्ञानशाला की बालिकाओं के गीत से हुआ। इसके बाद घाटकोपर, चेम्बूर, पार्क साईट और काजुपाड़ा के बच्चों ने भावपूर्ण लघु नाटिकाओं की सुंदर प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम संयोजक महेश गांधी ने स्वागत किया, जबकि अभय गांधी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम प्रातः 9.00 से 11.00 बजे तक सुव्यवस्थित रूप से चला। मंत्रदीक्षा के माध्यम से बच्चों को नवकार मंत्र के स्मरण और जीवन में सुसंस्कारों को अपनाने का संदेश दिया गया।