आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना: बदराणा को ‘निरोगी व आदर्श गांव’ बनाने के लिए आयुष मित्रों व सखियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के तहत बदराणा में 10 आयुष मित्रों और 23 आयुष सखियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 18 स्वास्थ्य सूचकांकों, एनसीडी स्क्रीनिंग, बीपी-शुगर जांच और 11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि के लक्ष्य के साथ गांव को निरोगी व आदर्श बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।
तस्वीर में बदराणा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर के अंदर चिकित्सा प्रभारी डॉ. शीला दरांगी मेज पर बैठे उपकरणों के साथ दिख रही हैं, और उनके सामने बेंच पर प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागी बैठे हैं।
आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के तहत बदराणा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) में 10 आयुष मित्रों और 23 आयुष सखियों का विशेष प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से गांव को पूरी तरह निरोगी और स्वास्थ्य के लिहाज से आत्मनिर्भर बनाना है। योजना को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने में आयुष मित्र और आयुष सखियों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया।
प्रशिक्षण शिविर के दौरान योजना के तहत निर्धारित 18 प्रमुख स्वास्थ्य सूचकांकों की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी गई। उन्हें बताया गया कि इन सभी 18 मानकों पर खरा उतरकर ‘आदर्श ग्राम’ का लक्ष्य हासिल करने वाली ग्राम पंचायत को 11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी उद्देश्य को लेकर प्रशिक्षण में इन सूचकांकों पर विशेष रूप से मंथन किया गया।
शिविर में चिकित्सा प्रभारी डॉ. शीला दरांगी ने गांवों में तेजी से बढ़ रहे गैर-संचारी रोगों (NCD - Non-Communicable Diseases) की समय रहते पहचान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी 33 प्रतिभागियों को एनसीडी (NCD) स्क्रीनिंग के तहत बीपी (रक्तचाप) और शुगर (मधुमेह) की जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान आयुष मित्रों और आयुष सखियों को बीपी इंस्ट्रूमेंट, ग्लूकोमीटर, पल्स ऑक्सीमीटर और इन्फ्रारेड थर्मोमीटर का सही उपयोग विस्तार से सिखाया गया।
डॉ. शीला दरांगी ने प्रतिभागियों को यह भी समझाया कि बीपी, ऑक्सीजन स्तर और शुगर की कौन-सी रीडिंग मरीज के लिए कितनी घातक (क्रिटिकल) हो सकती है तथा ऐसी स्थिति में तुरंत कौन-से प्राथमिक कदम उठाए जाने चाहिए। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर समय रहते गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और प्रारंभिक सहायता सुनिश्चित करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. दरांगी ने बताया कि समय पर जांच नहीं होने से हाई बीपी के कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जबकि अनियंत्रित शुगर किडनी और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, ऋतुचर्या का पालन करने, संतुलित आहार अपनाने, योग को दैनिक जीवन में शामिल करने तथा नशा मुक्ति पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दिया।
शिविर के सफल आयोजन में स्वास्थ्य विभाग की टीम की सक्रिय सहभागिता रही। इस दौरान नर्स ललिता, परिचारक शांतिलाल, आयुष मित्र विमला, योग प्रशिक्षक कुलदीप जोशी और आशा सहयोगिनी गीता शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बदराणा गांव को पूर्णतः निरोगी और आदर्श गांव बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।