तस्वीर में प्रतापगढ़ रामद्वारा में आयोजित रक्तदान शिविर और संत शंभूराम महाराज के दीक्षा दिवस कार्यक्रम में उपस्थित संत, अतिथि और रक्तदाता नजर आ रहे हैं।

प्रतापगढ़ रामद्वारा में चातुर्मास के तहत अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत शंभूराम महाराज के 62वें दीक्षा दिवस के अवसर पर बुधवार को रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में प्रतापगढ़ सहित बाहर से आए भक्तों ने भी उत्साह के साथ रक्तदान किया, जिसमें कुल 88 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ।

रक्तदान शिविर के बाद आयोजित धर्मसभा में अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के भंडारी संत शंभूराम महाराज ने सनातन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म अपनी भक्ति और गहराई के कारण विश्व में अजर-अमर है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म फौलादी था, फौलादी है और फौलादी रहेगा।

संत शंभूराम महाराज ने कहा कि जीवन में बदलाव लाने की आवश्यकता है, लेकिन किसी से बदला लेने की भावना नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बदले की भावना परिवार और समाज के रिश्तों को रक्तरंजित इतिहास में बदल देती है। इसके विपरीत जब व्यक्ति स्वयं को बदलने का प्रयास करता है तो जहरीला वातावरण भी अमृतमय बन सकता है। इसलिए बदला लेने के बजाय खुद को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि संत और गुरु दृष्टि बदलते हैं तो सृष्टि और जीवन बदल जाता है। वे विचार और संसार बदलने की प्रेरणा देते हैं, बदला नहीं लेते। यही उनकी शक्ति है। उन्होंने कहा कि शब्दों के अर्थ समझना कठिन नहीं है, लेकिन विचारों की गहराई को समझना जटिल है।

संत ने कहा कि ज्ञान की पाठशालाएं चल रही हैं और ज्ञान की बाढ़ आई हुई है, फिर भी मानव अज्ञान के गर्त में गिरता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी, जवाबदारी, वफादारी और ईमानदारी जैसे मूल्यों से समझदार व्यक्ति भी किनारा करता नजर आ रहा है।

संत शंभूराम महाराज ने कहा कि भगवंत के नाम का जाप करने से जीवन के ताप, परिताप और संताप का अंत हो जाता है। उन्होंने कहा कि संसार में सार और असार को समझने की जरूरत है और भगवत नाम ही वास्तविक सार है। भगवान को भूल जाने से बड़ा कोई दुख नहीं है और भगवान को याद रखने से बढ़कर संसार में कोई सुख नहीं है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार में सुख पाने के लिए भगवान की माया को याद करता है, लेकिन उसके सृजनहार परमात्मा को याद करने के लिए समय नहीं निकालता। जिस दिन व्यक्ति भगवान को गहराई से याद करने लगेगा, उस दिन सांसारिक मोह अपने आप कम होने लगेगा।

कार्यक्रम के दौरान गौ माता के महत्व और गौ सेवा को लेकर भी संदेश दिया गया। संतों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गौ संरक्षण और संवर्धन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी है। लोगों से अपील की गई कि वे अपने दैनिक जीवन में गौ ग्रास निकालने के साथ गौशालाओं में सेवा और सहयोग करें तथा गौ संरक्षण के लिए आगे आएं।

कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय के पीएमओ डॉ आलोक यादव, डॉ दलीप कुमार, समाजसेवी एवं पूर्व पालिका अध्यक्ष ओम प्रकाश ओझा, पूर्व सभापति कमलेश डोसी, मंडल अध्यक्ष उत्सव जैन, महिला कांग्रेस अध्यक्ष नेहा आशीष शर्मा, पूर्व पार्षद महेश कुमावत, समाजसेवी गोपाल मोदी सहित कई पदाधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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