छोटीसादड़ी तहसील की 60 साल पुरानी इमारत जर्जर, खतरे के बीच काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी
छोटीसादड़ी तहसील कार्यालय की करीब 60 साल पुरानी इमारत जर्जर हालत में है। छत और दीवारों से हादसे का खतरा बना हुआ है। शिकायतों और मरम्मत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से अधिकारी-कर्मचारी नई बिल्डिंग का इंतजार कर रहे हैं।
छोटीसादड़ी तहसील कार्यालय की करीब 60 वर्ष पुरानी जर्जर इमारत, जहां लगातार छत का प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरारें आने से हादसों का अंदेशा बना हुआ है।
छोटीसादड़ी तहसील कार्यालय की करीब 60 वर्ष पुरानी इमारत जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। छत और दीवारों की खराब स्थिति के कारण यहां कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद अधिकारी और कर्मचारी इसी भवन में बैठकर सरकारी कामकाज करने को मजबूर हैं। शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने और मरम्मत के नाम पर औपचारिकता किए जाने के आरोपों के बीच अब कर्मचारियों को नई इमारत का इंतजार है।
आमजन को राहत देने और सरकारी कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने वाला तहसील कार्यालय खुद बदहाली का सामना कर रहा है। भवन की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि छत से मलबा गिरने या दीवार ढहने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जर्जर इमारत के बीच रोजमर्रा का सरकारी कामकाज जारी रहने से किसी बड़े हादसे की आशंका भी बनी हुई है।
तहसील कार्यालय की जर्जर इमारत का मुद्दा कई बार उठाया जा चुका है। शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। आरोप है कि समय-समय पर मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि भवन की वास्तविक स्थिति में सुधार नहीं होता। इसके चलते अधिकारियों और कर्मचारियों को हर दिन असुरक्षित माहौल में काम करना पड़ रहा है।
इस भवन में खतरा केवल कार्यालय के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। तहसील कार्यालय में राजस्व संबंधी कामकाज के लिए प्रतिदिन ग्रामीणों और आम नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है। जमीन संबंधी मामलों, नामांतरण, प्रमाण पत्रों और अन्य सरकारी कार्यों के लिए पहुंचने वाले लोगों को भी इसी जर्जर इमारत में समय बिताना पड़ता है। ऐसे में छत और दीवारों की खराब स्थिति यहां आने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
करीब छह दशक पुरानी इमारत की मौजूदा हालत को देखते हुए केवल मरम्मत के भरोसे कार्यालय का संचालन जारी रखना कितना उचित है, यह सवाल भी उठ रहा है। अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से नई बिल्डिंग की आस लगाए बैठे हैं। अब जरूरत भवन की तकनीकी जांच करवाकर उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करने और उसके आधार पर आवश्यक कदम उठाने की है।
यदि तकनीकी जांच में भवन असुरक्षित पाया जाता है तो वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ नई इमारत के निर्माण की दिशा में ठोस पहल जरूरी होगी। सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों और वहां पहुंचने वाले नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में छोटीसादड़ी तहसील कार्यालय की जर्जर इमारत को लेकर संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। अब देखना यह है कि लगातार शिकायतों और हादसे की आशंका के बीच प्रशासन समय रहते स्थायी समाधान करता है या किसी अनहोनी के बाद ही कदम उठाए जाते हैं।