परिषद की बैठक में हंगामा: केरल नगर निगम टकराव में भाजपा पार्षद पर मारपीट का आरोप
तिरुवनंतपुरम नगर निगम की BJP-नेतृत्व वाली परिषद बैठक में भारी हंगामा और हिंसा देखने को मिली, जहां भाजपा पार्षद चेम्पाझनथी उदयन पर विपक्ष ने मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। बैठक के दौरान CPI(M) और UDF पार्षदों के विरोध के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम की बैठक में हंगामा
तिरुवनंतपुरम नगर निगम की एक साधारण मानी जा रही परिषद बैठक उस समय हिंसक टकराव में बदल गई, जब सत्तारूढ़ भाजपा नेतृत्व वाली परिषद में मौजूद पार्षदों के बीच तीखी बहस ने अचानक उग्र रूप ले लिया। इस घटना में भाजपा के पार्षद एवं शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष चेम्पाझनथी उदयन का नाम सामने आया है, जिन पर विपक्षी पार्षदों ने मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरी घटना ने निगम परिसर में राजनीतिक तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया।
सूत्रों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, बैठक के दौरान पहले से ही माहौल तनावपूर्ण था, क्योंकि विपक्षी दलों मुख्य रूप से CPI(M) और ुद्फ के पार्षद लगातार कार्यसूची से जुड़े फैसलों और कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध दर्ज करा रहे थे। आरोप है कि इसी विरोध और तीखी नोकझोंक के बीच स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और परिषद कक्ष में हंगामा शुरू हो गया, जो आगे चलकर हाथापाई में बदल गया।
विपक्षी पार्षदों का दावा है कि बहस के दौरान भाजपा सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिनमें उपस्थिति रजिस्टर छीनने और दस्तावेजों को फाड़ने की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि विरोध के बावजूद एजेंडा को आगे बढ़ाने और बैठक को आगे ले जाने की कोशिश की गई, जिसके बाद कुछ पार्षद बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए।
इसी दौरान चेम्पाझनथी उदयन पर विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि उन्होंने विरोध कर रहे पार्षदों के साथ शारीरिक हस्तक्षेप किया और कथित रूप से मारपीट की। यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने मीडिया से बातचीत करने की कोशिश कर रहे UDF पार्षदों को रोकने का प्रयास किया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
विपक्ष का कहना है कि चेम्पाझनथी उदयन ने न केवल विरोध को दबाने का प्रयास किया, बल्कि परिषद कक्ष में हुई बहस को हिंसक मोड़ देने में भी भूमिका निभाई। हालांकि ये सभी आरोप विपक्षी पार्षदों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि या पुलिस जांच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
यह घटना किसी अलग-थलग विवाद का हिस्सा नहीं मानी जा रही है। पिछले कुछ दिनों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम में लगातार राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है, जहां विभिन्न गुटों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे पहले भी भाजपा और CPI(M)/UDF पार्षदों के बीच झड़पों में कई लोग घायल हुए थे और कुछ मामलों में पुलिस हस्तक्षेप तक की स्थिति बनी थी। निगम परिसर में कथित रूप से हिंसा और अनियमितताओं को लेकर पहले भी कई FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें मेयर और उपमेयर तक के नाम सामने आए थे।
चेम्पाझनथी उदयन का नाम इस पूरे विवाद में प्रमुख रूप से इसलिए उभरकर सामने आया है क्योंकि वे भाजपा के वरिष्ठ पार्षद और शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं। ऐसे में उन पर लगे आरोपों ने राजनीतिक विवाद को और अधिक संवेदनशील और व्यापक बना दिया है। विपक्षी दल इसे सत्ता पक्ष की आक्रामक कार्यशैली और “संस्थागत दबाव की राजनीति” के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम की यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रशासनिक निकायों में राजनीतिक टकराव किस तरह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है और कैसे परिषद की बैठकें विकासात्मक चर्चा के बजाय संघर्ष का मंच बनती जा रही हैं।