अमेरिका-ईरान का उदाहरण देकर मीरवाइज की अपील, बोले- भारत-पाकिस्तान भी बातचीत की राह अपनाएं|

अमेरिका-ईरान के उदाहरण के साथ अलगाववादी नेता ने की वार्ता की वकालत, भारत का रुख आतंकवाद पर अडिग।

Update: 2026-07-02 08:10 GMT

कश्मीर के धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक और भारत-पाकिस्तान के राष्ट्रध्वज, वार्ता की संभावनाओं पर चर्चा के संदर्भ में।

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों का वर्तमान स्वरूप एक लंबे गतिरोध से घिरा हुआ है। वर्ष 2016 के बाद से दोनों देशों के बीच आधिकारिक वार्ता की प्रक्रिया पूरी तरह ठप है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, विशेषकर पठानकोट और उरी हमलों के बाद। इस बीच कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने दोनों देशों के बीच संवाद बहाली की वकालत की है। उन्होंने वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए शांति प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया है।

मीरवाइज उमर फारूक ने ईरान और अमेरिका के बीच हालिया कूटनीतिक सक्रियता का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि यदि दो परस्पर विरोधी देश अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए वार्ता की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान ऐसा क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने 26 जून को जामिया मस्जिद में दिए गए अपने भाषण और लाल चौक पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि युद्ध किसी भी विवाद का समाधान नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक वार्ताओं का समर्थन किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्रीय तनाव कम हो सके।

भारत-पाकिस्तान संबंधों में यह तनाव दशकों पुराना है, जो समय के साथ और अधिक जटिल हुआ है। वर्ष 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा के दौरान व्यापक द्विपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने की पहल की गई थी, लेकिन 2016 के आतंकी हमलों ने इसे पूरी तरह विफल कर दिया। फरवरी 2019 में पुलवामा हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के बाद पाकिस्तान ने व्यापारिक संबंधों को निलंबित कर दिया और राजनयिक स्तर को कम कर दिया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई पूर्णकालिक उच्चायुक्त नियुक्त नहीं है।

भारत सरकार का आधिकारिक स्टैंड इस मामले में अडिग है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, आधिकारिक स्तर पर बातचीत के सभी चैनल बंद हैं और भारत की प्राथमिकता आतंकवाद पर लगाम लगाना है। भारत का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक किसी भी द्विपक्षीय बातचीत की संभावना नहीं है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले और सिंधु जल समझौते से जुड़े घटनाक्रमों के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी गलत हरकत की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मीरवाइज उमर फारूक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पार गतिविधियां और कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर हैं।

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