संसद में हाथ उठाकर बोलती राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल, विपक्ष के हंगामे और सदन का समय बर्बाद होने के संदर्भ में।

संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे और गतिरोध को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब-जब संसद की कार्यवाही बाधित होती है और सदन का समय बर्बाद होता है, तब-तब इसका सीधा नुकसान देश की आम जनता को उठाना पड़ता है। संसद भवन परिसर में अपनी बात रखते हुए उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सदन की बहुमूल्य ऊर्जा और करदाताओं (टैक्सपेयर्स) के करोड़ों रुपये व्यर्थ जा रहे हैं।

मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी तनातनी और विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही जगहों पर कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और बिल बिना व्यापक चर्चा के ही पारित कराए गए हैं। इसी स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्वाति मालीवाल ने कहा कि मानसून सत्र का चौथा हफ्ता चल रहा है, लेकिन विपक्ष ने एक भी दिन सुचारू रूप से संसद को चलने नहीं दिया। उन्होंने अफसोस जताया कि देश के आम नागरिकों की अनगिनत उम्मीदें इस सर्वोच्च सदन से जुड़ी हुई हैं और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर गंभीर चर्चा होनी थी, लेकिन सार्थक बहस के बजाय केवल शोरगुल और नारेबाजी को ही प्राथमिकता दी गई।

सांसद मालीवाल ने जोर देकर कहा कि संसद का यह पवित्र मंच चीखने-चिल्लाने, टेबल पीटने या ताली बजाने के लिए नहीं बना है, बल्कि यह देश की जनता से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने और उनका समाधान खोजने का प्राथमिक केंद्र है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को सुगम और सरल बनाने वाले ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। यह वह समय था जब विपक्षी दलों को जनता की बात रखनी चाहिए थी, सरकार से सवाल पूछने चाहिए थे और अपने रचनात्मक सुझाव देने चाहिए थे, लेकिन उन्होंने हर बार हंगामे का ही रास्ता चुना।

अपने संबोधन के अंत में स्वाति मालीवाल ने विपक्ष से पुरजोर अपील की कि वे सरकार का विरोध अवश्य करें, तीखे सवाल पूछें और सरकार को जवाबदेह बनाएं, लेकिन संसद की कार्यवाही को बाधित न होने दें। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि लोकतंत्र में संसद का रुकना किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश की जनता का नुकसान है। इसके साथ ही उन्होंने नशे की अवैध बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने, शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने तथा अभिभावकों को सतर्क करने की भी मांग की, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके।