आरएसएस के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी, कर्नाटक सरकार कर रही 100 साल के इतिहास की स्टडी|
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर सख्त कार्रवाई करेगी।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर माहौल गर्मा गया है। राज्य सरकार ने आरएसएस के खिलाफ कानूनी दायरे में रहकर सख्त कदम उठाने की दिशा में गंभीर विचार शुरू कर दिया है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि कांग्रेस सरकार आरएसएस के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी और इसके लिए संगठन तथा उसके 100 साल पुराने इतिहास का गहन अध्ययन किया जा रहा है। सरकार का यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
बेंगलुरु में मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि आगे की कोई भी ठोस कार्रवाई तय करने से पहले संघ और उसके इतिहास को भली-भांति समझना जरूरी है। जब पत्रकारों ने उनसे यह सवाल किया कि संघ के पंजीकरण और अन्य मुद्दों को लेकर उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जो पत्र लिखा था, क्या उसका कोई जवाब मिला है, तो खड़गे ने हंसते हुए जवाब दिया कि उन्हें इस बात की कोई उम्मीद ही नहीं थी कि उधर से कोई उत्तर आएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही कह दिया था कि जवाब नहीं आएगा और वे इस पूरे मामले से पूरी तरह उचित तरीके से निपटेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार जो भी कदम उठाएगी, वह पूरी तरह से कानून के दायरे में होगा।
मंत्री प्रियांक खड़गे ने तीखे शब्दों में कहा कि वे (आरएसएस) कानूनी दायरे से बाहर हैं और वह उन्हें कानून के दायरे में लेकर आएंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह इस मामले को यूं ही नहीं छोड़ने वाले हैं। इस मुद्दे को उठाए लगभग डेढ़ महीना बीत चुका है, और सरकार बिना किसी जल्दबाजी के सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना चाहती है। इसी के चलते सरकार को आरएसएस के 100 साल के इतिहास का अध्ययन करने और उसे पूरी तरह से समझने के लिए समय की आवश्यकता है, क्योंकि उनके अनुसार संगठन को खुद अपने इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है।
इस दौरान प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर भी कड़ा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अब यह जानकारी सामने आ रही है कि मोहन भागवत ने हाल ही में 'जेन-जी' यानी जनरेशन जी (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों) के कुछ युवाओं से मुलाकात की है। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तंज कसा कि क्या पहले युवाओं की पिटाई करना और बाद में उनका समर्थन करना ही उनका तरीका है। खड़गे ने यह बड़ा सवाल भी उठाया कि आखिरकार किसी व्यक्ति को देशभक्त या देशद्रोही होने का प्रमाण पत्र बांटने का अधिकार आरएसएस को किसने दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब वे खुद पंजीकृत नहीं हैं, तो वे दूसरों को प्रमाणपत्र बांटने वाले कौन होते हैं।
यह पूछे जाने पर कि यदि उनके पत्र का कोई जवाब नहीं मिलता है तो सरकार का अगला कदम क्या होगा, खड़गे ने कहा कि सरकार अपनी तय योजना और रणनीति के मुताबिक ही आगे बढ़ेगी, हालांकि उन्होंने फिलहाल अपनी अगली कार्ययोजना का खुलासा करने से इनकार कर दिया। कर्नाटक सरकार के इस रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में आरएसएस को लेकर यह कानूनी और वैचारिक टकराव और अधिक गहरा सकता है।