सिरोही की अनु कुमारी ने प्रगति कार्यक्रम से जुड़कर दोबारा शुरू की पढ़ाई।

राजस्थान के सिरोही की 20 वर्षीय अनु कुमारी ने आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू कर न केवल दसवीं की परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों के साथ पास की, बल्कि अपनी पहली कमाई से घर में बिजली का कनेक्शन भी लगवाया। अब वे 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं और डॉक्टर बनना चाहती हैं। एजुकेट गर्ल्स संस्था के प्रगति कार्यक्रम से जुड़ने के बाद अनु ने शिक्षा की राह पर फिर से कदम बढ़ाए।

नौ सदस्यों वाले परिवार में अनु का बचपन आर्थिक तंगी के बीच बीता। उनके घर में बिजली और शौचालय की सुविधा नहीं थी। पानी लाने के लिए उन्हें हर दिन 15 मिनट पैदल चलकर सरकारी टंकी तक जाना पड़ता था। वर्ष 2019 में उनकी मां सड़क हादसे में घायल हो गईं, जिसके बाद घर की जिम्मेदारियां भी अनु के कंधों पर आ गईं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वर्ष 2021 में दसवीं की परीक्षा में असफल होने के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

तीन साल बाद अनु की जिंदगी में दोबारा पढ़ाई शुरू करने का अवसर आया। घर-घर सर्वे के दौरान प्रगति कार्यक्रम की एक सदस्य उनसे मिलीं और उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद वर्ष 2024 में अनु ने प्रगति कैंप के माध्यम से फिर से पढ़ाई शुरू की। घर के कामकाज और पानी भरने की जिम्मेदारी के साथ पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी।

अनु ने वर्ष 2025 में राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से दसवीं की परीक्षा 70 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। इसी वर्ष उन्होंने नगर पालिका के लिए सर्वे करके पहली बार 3,500 रुपये कमाए। अपनी मेहनत से अर्जित इस रकम का इस्तेमाल उन्होंने घर में बिजली का कनेक्शन लगवाने के लिए किया। इसके बाद उन्हें मनरेगा में मेट का काम मिला, जिससे उनकी मासिक कमाई करीब 6,000 रुपये हो गई।

अब अनु अपनी कमाई से घर के खर्च में योगदान देने के साथ छोटे भाइयों की पढ़ाई में भी मदद करती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी है। फिलहाल वे 12वीं कक्षा में पढ़ रही हैं और उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है।

अनु दूसरी लड़कियों से भी पढ़ाई दोबारा शुरू करने की अपील करती हैं। उनका कहना है, "शिक्षा से ही हम अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, खुद कमा सकते हैं और अपने परिवार की मदद कर सकते हैं।" अनु का सफर दिखाता है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छूट जाने के बाद भी दोबारा शिक्षा हासिल करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।