केंद्र ने लागू की कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026, EPF खातों में डिजिटल बदलाव और नए नियम प्रभावी

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026 को अधिसूचित कर EPF योजना, 1952 की जगह लागू कर दिया है। 29 जून से प्रभावी नई व्यवस्था में 12% अंशदान यथावत रखा गया है, जबकि डिजिटल अनुपालन, ऑनलाइन दावे, UAN लिंकिंग और आंशिक निकासी से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

Update: 2026-07-04 11:55 GMT

तस्वीर में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का आधिकारिक लोगो दिख रहा है।

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 1952 की जगह कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund) योजना, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020 के कार्यान्वयन के तहत उठाया गया है। नई योजना 29 जून से प्रभावी हो गई है और इसके राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होने के साथ ही इसे लागू कर दिया गया।

नई योजना का उद्देश्य डिजिटल अनुपालन को मजबूत करना, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना, खातों की पोर्टेबिलिटी बढ़ाना तथा भविष्य निधि व्यवस्था को नए श्रम संहिताओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों की ओर से वेतन का अनिवार्य 12 प्रतिशत-12 प्रतिशत EPF अंशदान पहले की तरह ही जारी रहेगा। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित प्रतिष्ठानों के लिए मौजूदा 10 प्रतिशत अंशदान की दर भी पहले की तरह लागू रहेगी।

योजना में आंशिक निकासी से जुड़े नियमों को भी अद्यतन किया गया है। इसके तहत सदस्य चिकित्सा उपचार, शिक्षा, विवाह, आवास तथा अन्य निर्दिष्ट आवश्यकताओं के लिए भविष्य निधि से धनराशि निकाल सकेंगे। हालांकि, इसके लिए न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने और अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा।

नई योजना में इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग, ऑनलाइन दावों, ई-पासबुक और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से लिंकिंग पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारी भविष्य निधि के प्रबंधन को अधिक दक्ष एवं प्रभावी बनाना है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 के लागू होने के साथ भविष्य निधि प्रणाली को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुरूप संचालित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव लागू हो गया है।

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