दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस में घमासान, भाजपा ने लिया मौका

वीर भारत न्यास भूमि मामले पर दिग्विजय सिंह के फैक्ट-चेक से कांग्रेस के भीतर असहजता बढ़ गई है, जबकि भाजपा ने इसे कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज करने का अवसर माना है।

Update: 2026-07-02 11:36 GMT

तस्वीर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी बात रखते हुए दिख रहे हैं।

भोपाल: दशकों तक भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े राजनीतिक निशानों में रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अब अचानक भाजपा नेताओं की तारीफ का केंद्र बन गए हैं। हालांकि यह प्रशंसा उन्हें भारी पड़ती दिख रही है, क्योंकि उनके ही बयान के बाद कांग्रेस के भीतर असहजता और विरोध खुलकर सामने आ गया है।

ताजा घटनाक्रम में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने दिग्विजय सिंह को खुला न्योता देते हुए भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को "अच्छे बुजुर्ग" बताते हुए कहा कि वह सभी की मदद करते हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रही। लोधी ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका "राजाओं की तरह" सम्मान किया जाएगा।

इस पर कांग्रेस नेता रवि सक्सेना ने पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह का "डीएनए कांग्रेस में रचा-बसा है।" उन्होंने उन्हें पार्टी का वफादार सिपाही बताते हुए कहा कि वह ऐसे नेता हैं जिनसे भाजपा आज भी कांपती है। उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वह यह सपना देखना छोड़ दे कि दिग्विजय सिंह कभी कांग्रेस छोड़ेंगे।

पूरा विवाद उज्जैन के वीर भारत न्यास भूमि प्रकरण से जुड़ा है। 24 जून को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राष्ट्रीय दैनिक की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े भूमि खरीद मामलों पर सवाल उठाए थे।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र 1 रुपये के प्रतीकात्मक मूल्य पर दे दी गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस न्यास से जुड़े हैं और पूछा कि इतनी महंगी जमीन किस आधार पर आवंटित की गई।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद उज्जैन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के आरोपों से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये की जमीन किसी निजी ट्रस्ट को 1 रुपये में देने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि उनके पास उपलब्ध सभी दस्तावेज यह साबित करते हैं कि संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं दी गई, बल्कि संबंधित न्यास एक सरकारी ट्रस्ट है। उन्होंने कहा कि वह बिना शोध के किसी मुद्दे पर नहीं बोलते। उनके अनुसार दस्तावेज बताते हैं कि यह सरकारी ट्रस्ट है, जिसका पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि झूठे आरोप लगाकर पैसे कमाने वाले "दलालों" की कोई कमी नहीं है।

दिग्विजय सिंह का यह बयान कांग्रेस के भीतर राजनीतिक विस्फोट की तरह माना गया। जीतू पटवारी अपने आरोपों पर कायम रहे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस में यह चर्चा शुरू हो गई कि दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष के दावों का खंडन कर दिया है। बाद में बड़वानी जिले में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी उन्होंने लगभग यही रुख दोहराया, जिससे असहजता और बढ़ गई।

दिग्विजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन जानकारियों के आधार पर जीतू पटवारी ने आरोप लगाए थे, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय समाचार पत्र की रिपोर्ट से मिली थी। उन्होंने कहा कि संबंधित भाजपा विधायक के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अच्छे संबंध नहीं हैं, लेकिन जब उन्होंने पूरे मामले की जांच की तो पाया कि संबंधित न्यास वास्तव में सरकारी ट्रस्ट है।

भाजपा ने इसे कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज करने का अवसर बना लिया। प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने एक्स पर लिखा कि झूठ की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती और दावा किया कि जिस अभियान को जीतू पटवारी सच साबित करने की कोशिश कर रहे थे, उसे स्वयं दिग्विजय सिंह ने ही बेअसर कर दिया। भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को आईना दिखाया है। उनका कहना था कि कांग्रेस नेता बिना दस्तावेजों की पुष्टि किए आरोप लगा रहे थे, जबकि दिग्विजय सिंह ने कम से कम रिकॉर्ड देखकर बयान दिया।

हुजूर विधायक रमेश्वर शर्मा, जो पहले कई बार दिग्विजय सिंह पर तीखे हमले कर चुके हैं, उन्होंने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने तथ्यों पर आधारित रुख अपनाकर जीतू पटवारी के आरोपों की पोल खोल दी और कांग्रेस की आंतरिक विरोधाभासों को सामने ला दिया।

राजनीतिक घटनाक्रम उस समय और गर्मा गया जब भोपाल स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मंगलवार को कांग्रेस राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक हुई। बैठक में विधायक आरिफ मसूद और पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने कथित तौर पर यह मुद्दा उठाया कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के रुख पर आपत्ति थी तो उन्हें सार्वजनिक बयान देने के बजाय पार्टी के अंदर अपनी बात रखनी चाहिए थी।

सबसे तीखा हमला कांग्रेस महासचिव और पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखते हुए सवाल किया, "कांग्रेस दिग्विजय सिंह के नागपाश से कब मुक्त होगी?"

मंगलवार शाम तक स्थिति संभालने की कोशिश करते हुए जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस डॉ. मोहन यादव सरकार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े सभी भूमि सौदों की शिकायतों की पार्टी स्तर पर जांच की जा रही है और इस मुद्दे पर कांग्रेस मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।

दिग्विजय सिंह ने अपने "दलाल" वाले बयान पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके और जीतू पटवारी के बीच मतभेद की भ्रमपूर्ण स्थिति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा, "जीतू पटवारी मेरे बेटे जैसे हैं। मैंने कांग्रेस में आधी सदी से अधिक समय बिताया है। मैं प्रदेश अध्यक्ष सहित पार्टी के किसी भी नेता के लिए 'दलाल' शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं कर सकता।"

वीर भारत न्यास भूमि विवाद पर दिग्विजय सिंह के फैक्ट-चेक ने न केवल कांग्रेस के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया, बल्कि भाजपा को भी कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज करने का अवसर दे दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में यह विवाद कांग्रेस की एकजुटता और विपक्ष की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।

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