नासिक: कुंभ मेले की तैयारियों के बीच त्र्यंबकेश्वर मंदिर बंद करने का प्रस्ताव
15 अक्टूबर से दो महीने मंदिर बंद रहने पर श्रद्धालुओं के दर्शन और स्थानीय कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
तस्वीर में महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर का बाहरी परिसर नजर आ रहा है।
महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भगवान त्र्यंबकेश्वर के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है। आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच मंदिर को 15 अक्टूबर से 15 दिसंबर 2026 तक दो महीने के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु बंद रखने का प्रस्ताव सामने आया है। इस अवधि में दर्शन पथ और मंदिर परिसर में विकास कार्य पूरे करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव से दशहरा, दिवाली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के रथोत्सव के दौरान दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है। वहीं, मंदिर बंद रहने की संभावना से स्थानीय कारोबारियों में भी चिंता का माहौल है।
सिंहस्थ कुंभ मेले के कार्यों के लिए मंदिर बंद रखने का प्रस्ताव
नासिक-त्र्यंबकेश्वर में वर्ष 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में दर्शन पथ और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए संबंधित ठेकेदारों की ओर से मंदिर को कुछ समय तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रखने की मांग किए जाने की खबर है।
बताया जा रहा है कि 15 अक्टूबर से अगले दो महीने तक मंदिर बंद रखने से विकास कार्यों को गति मिल सकती है। इसी उद्देश्य से मंदिर बंद रखने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
दशहरा, दिवाली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के उत्सव पर असर की आशंका
त्र्यंबकेश्वर मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यहां पूरे वर्ष देशभर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से दशहरा, दिवाली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
यदि मंदिर बंद रखने का प्रस्ताव लागू होता है, तो इन प्रमुख धार्मिक पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान त्र्यंबकेश्वर के दर्शन नहीं मिल पाने की आशंका है। त्र्यंबकेश्वर संस्थान की लगभग 300 वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़े त्रिपुरारी पूर्णिमा के रथोत्सव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित अवधि के दौरान मंदिर की दर्शन व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय कारोबारियों को रोजगार और आय प्रभावित होने का डर
त्र्यंबकेश्वर शहर में कई कारोबारियों की आजीविका मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर है। पूजा सामग्री विक्रेताओं, फूल विक्रेताओं, होटल कारोबारियों, दुकानदारों और अन्य छोटे व्यापारियों को श्रद्धालुओं की आवाजाही से रोजगार मिलता है।
स्थानीय कारोबारियों की शिकायत है कि शहर में पहले से चल रहे विभिन्न विकास कार्यों के कारण उनके व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। ऐसे में यदि मंदिर दो महीने तक बंद रहता है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। मंदिर बंद रहने से देवस्थान संस्थान की आय पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
पालकमंत्री गिरीश महाजन ने विकास कार्यों का किया निरीक्षण
राज्य के पालकमंत्री गिरीश महाजन ने गुरुवार को त्र्यंबकेश्वर पहुंचकर वहां चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान देवस्थान ट्रस्ट के कार्यालय में मंदिर परिसर के कार्यों और दर्शन पथ की प्रगति को लेकर चर्चा होने की खबर है। इस बैठक में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और मंदिर संस्थान के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच प्रशासन के सामने विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की चुनौती है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों को गति देने के साथ श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और स्थानीय कारोबारियों के हितों का भी ध्यान रखना जरूरी है। मंदिर बंद रखने के प्रस्ताव को लेकर इन्हीं पहलुओं पर चर्चा हो रही है।
मंदिर बंद होने के अंतिम फैसले का इंतजार
त्र्यंबकेश्वर मंदिर को बंद रखने का प्रस्ताव फिलहाल चर्चा में है। मंदिर को बंद करने के अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में श्रद्धालुओं के सामने यह सवाल बना हुआ है कि मंदिर 15 अक्टूबर से बंद होगा या विकास कार्यों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जारी रखा जाएगा।
प्रशासन और देवस्थान संस्थान की ओर से अंतिम निर्णय की घोषणा के बाद ही दर्शन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। दशहरा, दिवाली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के दौरान त्र्यंबकेश्वर में दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं की नजर अब आधिकारिक घोषणा पर टिकी है।