नाशिक में गोदावरी तट पर 517 लोगों ने सामूहिक शंखनाद कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। Image ALT Text: तस्वीर में एक साथ शंख बजाते हुए सैकड़ों लोग नाशिक के गोदावरी तट पर दिख रहे हैं।   

महाराष्ट्र के नाशिक में गोदावरी के पवित्र तट पर 517 लोगों के सामूहिक शंखनाद ने नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। अमेरिका के एक साथ 303 शंखवादकों के पूर्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए इस उपलब्धि ने नाशिक का नाम इतिहास में दर्ज कराया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ऋषिकेश नाग ने रिकॉर्ड की घोषणा करते हुए कहा, “बधाई! आपने एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है!” इस घोषणा के साथ ही गोदावरी तट ‘भारत माता की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। इस आयोजन को आगामी सिंहस्थ कुंभमेले 2027 के मंगल पर्व की आध्यात्मिक शुरुआत के रूप में देखा गया।

नाशिक त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेला प्राधिकरण और अनंत विजय शंखनाद पथक के संयुक्त तत्वावधान में कोजागरी पूर्णिमा के पावन अवसर पर यशवंत महाराज पटांगण, गोदाकाठ में सामूहिक शंखनाद का आयोजन किया गया। राज्य के जल संसाधन मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री गिरीश महाजन की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में एक साथ गूंजे शंखध्वनि से पूरे परिसर में उत्साहपूर्ण वातावरण बना। गोदावरी के तट पर सामूहिक शंखनाद ने नाशिक की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया तथा सिंहस्थ कुंभमेले के स्वागत को लेकर नागरिकों में उत्साह पैदा किया।

इस अवसर पर महापौर हिमगौरी आडके आहेर, विधायक राहुल ढिकले, विधायक देवयानी फरांदे, विधायक सीमा हिरे, सिंहस्थ कुंभमेला प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह, महानगरपालिका आयुक्त मनीषा खत्री, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, सार्वजनिक निर्माण विभाग की मुख्य अभियंता अरुंधती शर्मा, अधीक्षक अभियंता देवेंद्र पवार, नियोजन विभाग के उपायुक्त योगेंद्र चौधरी, कार्यकारी अभियंता नवनाथ सोनवणे, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ऋषिकेश नाग, समन्वयक मिलिंद बेर्लेकर, अनंत विजय शंखनाद पथक की वृषाली घोलप और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी रवींद्र माने सहित साधु-महंत, शंखनाद करने वाले प्रतिभागी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

सामूहिक शंखनाद का विश्व रिकॉर्ड स्थापित होने के बाद पालकमंत्री गिरीश महाजन ने सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल नाशिक या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के गौरव में भी वृद्धि हुई है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।

शंखनाद भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। मंगल कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक उपासना में शंखनाद का विशेष महत्व है। नाशिक में इस परंपरा को विश्व रिकॉर्ड से जोड़ने का प्रयास साकार हुआ। सैकड़ों नागरिकों ने एक साथ शंखनाद करने के लिए जिस तैयारी, अनुशासन और उत्साह का प्रदर्शन किया, वह इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा। पालकमंत्री महाजन ने सभी प्रतिभागियों के योगदान को सराहनीय बताया। 517 लोगों की इस सामूहिक भागीदारी के साथ नाशिक ने आगामी सिंहस्थ कुंभमेले 2027 से पहले धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन के जरिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की।

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